
baghi jagan gujjar dacoit (Patrika File Photo)
Dacoit Jagan Gujjar: राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल से सोमवार दोपहर एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई, जिसने पूरे पुलिस महकमे और जेल प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। धौलपुर, करौली और चंबल के बीहड़ों में सालों तक आतंक का पर्याय रहे कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की जेल के भीतर गला घोंटकर बेरहमी से हत्या कर दी गई है।
इस दुस्साहसिक वारदात के बाद से जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिस जेल में परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहां इस तरह की हत्या होना सुरक्षा तंत्र की बड़ी नाकामी को दर्शाता है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और जेल प्रशासन के तमाम आला अधिकारी भारी पुलिस जाब्ते के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। फिलहाल, जेल के भीतर सघन जांच और कैदियों से पूछताछ शुरू कर दी गई है। ताकि इस हत्या के पीछे के कारणों और आरोपियों का पता लगाया जा सके।
तीन तरफ से बीहड़ों से घिरे धौलपुर में हमेशा से डकैतों का बोलबाला रहा है। यहां का 'डांग' इलाका चंबल के डकैतों का मुख्य ठिकाना माना जाता है और इसी डांग इलाके में जगन गुर्जर ने अपनी दहशत का साम्राज्य खड़ा किया था। धौलपुर के भवूतीपुरा (बसई डांग) का रहने वाला जगन गुर्जर कोई जन्मजात अपराधी नहीं था, बल्कि उसने अपराध की दुनिया में कदम एक निजी रंजिश के कारण रखा था।
साल 1994 में जगन गुर्जर के जीजा की हत्या कर दी गई थी। अपने जीजा की मौत का बदला लेने के लिए जगन ने कानून को अपने हाथ में लिया और अपराधियों को मौत के घाट उतार दिया। इस हत्याकांड के बाद जगन के लिए वापसी के सारे रास्ते बंद हो गए और वह हमेशा के लिए चंबल के बीहड़ों में कूद गया।
मैदान में उतरने के बाद जगन ने अपनी पत्नी और तीन भाइयों लाल सिंह, पान सिंह और पप्पू गुर्जर के साथ मिलकर एक मजबूत गैंग तैयार किया। इस गैंग ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती चंबल इलाकों में डकैती, लूट और हत्याओं का ऐसा सिलसिला शुरू किया कि जगन चंबल का 'बादशाह' बन गया।
जगन गुर्जर का खौफ इस कदर था कि उसके डर के मारे आसपास के गांवों में करीब 10 सालों तक लोगों ने अपनी बेटियों की शादियां तक नहीं कीं। लोग रात तो क्या, दिन में भी उसका नाम लेने से कतराते थे।
सालों तक पुलिस की नाक में दम करने के बाद, जगन गुर्जर की जिंदगी में एक नया मोड़ आया। वह कोमेश नाम की एक महिला से प्रेम करने लगा था। अपनी प्रेमिका के चक्कर में आकर साल 2001 में जगन ने धौलपुर के तत्कालीन एसपी बीजू जॉर्ज जोसेफ के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। साल 2005 में जगन जमानत पर बाहर आया। उसकी प्रेमिका कोमेश भी जेल से छूट चुकी थी। कोमेश ने तो अपराध का रास्ता छोड़ दिया और मुख्यधारा में लौट गई, लेकिन जगन ज्यादा दिन शांत नहीं रह पाया। उसने अपने भाइयों के साथ मिलकर फिर से हथियार उठा लिए और बीहड़ों का रुख कर लिया।
साल 2008 में राजस्थान में गुर्जर आंदोलन चरम पर था। इसी दौरान जगन गुर्जर ने एक बेहद दुस्साहसिक कदम उठाया। उसने राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित महल को बम से उड़ाने की धमकी दे डाली।
इस धमकी के बाद राजस्थान सरकार और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने जगन पर 11 लाख रुपए का भारी-भरकम इनाम घोषित कर दिया। इसके बाद राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश तीनों राज्यों की पुलिस जगन गुर्जर के पीछे हाथ धोकर पड़ गई।
चारों तरफ से पुलिस से घिरने और बचने का कोई रास्ता न देख, जगन ने एक बार फिर सरेंडर करने की योजना बनाई। 30 जनवरी 2009 को धौलपुर के कैमरी गांव में जगन्नाथ मेले का आयोजन हो रहा था। इस मेले में कांग्रेस के युवा नेता और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट पहुंचे थे। जगन गुर्जर ने भारी भीड़ के बीच सचिन पायलट के सामने अपने पूरे गैंग के साथ हथियार डाल दिए। इस आत्मसमर्पण के बाद जगन को करीब 8 साल जेल में बिताने पड़े। आखिरकार 6 मार्च 2017 को राजस्थान हाईकोर्ट ने उसे जमानत दे दी।
जेल से बाहर आने के बाद जगन ने सुधरने के बजाय फिर से वही पुराना रास्ता चुना। वह व्यापारियों और स्थानीय लोगों से चौथ वसूली करने लगा, मारपीट और फायरिंग की घटनाएं आम हो गईं।
जब पुलिस का दबाव फिर बढ़ा, तो 19 अगस्त 2018 की शाम को उसने भरतपुर के बयाना कोतवाली में जाकर तत्कालीन आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने तीसरी बार आत्मसमर्पण कर दिया। कोर्ट से दोबारा जमानत मिलने के बाद उसने अपनी दहशत बरकरार रखने के लिए करौली के व्यस्त बाजार में दिनदहाड़े अंधाधुंध फायरिंग कर दी।
जून महीने में जगन धौलपुर के बाड़ी कस्बे में पहुंचा और एक दुकानदार को पीटा। इसके बाद वह सायपुर करन सिंह का पुरा गांव पहुंचा। वहां मुखबिरी के शक में उसने एक परिवार को बंधक बनाया, बच्चों से मारपीट की और बंदूक की नोक पर महिलाओं को बिना कपड़ों के पूरे गांव में घुमाया। इस अमानवीय कृत्य से पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया।
साल 2017 में जेल से बाहर रहने के दौरान जगन गुर्जर ने अपनी पत्नी को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव में उतारा था। हालांकि, उसकी डकैत वाली हिंसक छवि के कारण जनता ने उसे नकार दिया और उसकी पत्नी को करारी हार का सामना करना पड़ा।
इसके बाद, 22 जनवरी 2022 को जगन ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया। इस वीडियो में उसने कांग्रेस विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया और उन्हें जान से मारने की सीधी धमकी दी।
इस घटना के बाद पुलिस ने उस पर 50 हजार रुपए का इनाम रखा और करौली पुलिस ने जंगलों में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया (हालांकि कुछ सूत्रों का कहना है कि उसने दबाव में चौथी बार सरेंडर किया था)।
जगन गुर्जर का पूरा परिवार ही अपराध के दलदल में धंसा हुआ था। जगन ने तीन शादियां की थीं। उसके तीनों भाई भी शातिर अपराधी हैं। पप्पू गुर्जर: वर्तमान में धौलपुर जेल में बंद है। पान सिंह गुर्जर: हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है (फिलहाल पैरोल पर बाहर है) और लाल सिंह गुर्जर: इसके खिलाफ भी कई संगीन मामले दर्ज हैं और पुलिस इसकी तलाश करती रही है।
जगन गुर्जर ने अपने जीवन में चार बार आत्मसमर्पण किया। हर बार ग्रामीणों और प्रशासन को उम्मीद होती थी कि शायद वह सुधर जाएगा और मुख्यधारा में लौटेगा, लेकिन बाहर आते ही वह फिर से खूनी खेल शुरू कर देता था।
अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में हुई जगन गुर्जर की इस हत्या ने चंबल के एक बड़े और खौफनाक अध्याय का हमेशा के लिए अंत कर दिया है। लेकिन इसके साथ ही, राजस्थान की सबसे सुरक्षित जेल की सुरक्षा पर एक ऐसा दाग लगा दिया है, जिसका जवाब देना जेल प्रशासन के लिए बेहद मुश्किल होगा।
Updated on:
29 Jun 2026 06:34 pm
Published on:
29 Jun 2026 05:58 pm
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