सूतक व ग्रहण काल में इनसे बचें
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि धर्मशास्त्रों में सूतक प्रारम्भ हो जाने के बाद मूर्ति स्पर्श, अनावश्यक भोजन, नाखुन काटना, तैलमालिश करना वर्जित बताया गया है। सूतक काल में बालक, वृद्ध, रोगी तथा गर्भवती स्त्रियां यथानुकूल भोजन या दवाई लेने में कोई दोष नहीं लगता है। ग्रहणकाल में पका हुआ अन्न, कटी हुई सब्जी व फल दूषित हो जाते है, उन्हें नहीं खाना चाहिए। लेकिन तेल या घी से पका हुआ अन्न, घी, तेल, दूध, दही, लस्सी, पनीर, आचार, पटनी, मुरब्बा में तिल या कुशा रख देने से वे दूषित नहीं होते है। सूखे खाद्य पदार्थों जैसे - गेंहू, चना, दाल, आटा, चीनी आदि में कुशा या तिल डालने की जरूरत नहीं है।