
ओमप्रकाश शर्मा/जयपुर।
जैसलमेर के चर्चित चतर सिंह मुठभेड़ मामले में सीआइडी की क्राइम ब्रांच ने पुलिस को क्लीन चिट दे दी है। मुठभेड़ के बाद सीबीआइ से मामले की जांच कराने के लिए अंदोलन हुआ था। सरकार ने जांच के लिए केन्द्र को 4 बार पत्र भी लिखा लेकिन केन्द्र ने स्वीकार नहीं किया। प्रदेश में मुठभेड़ का अब मात्र आनंदपाल सिंह का मामला लम्बित रहेगा। इसकी जांच अभी सीबीआइ कर रही है।
चतर सिंह मामले में मुठभेड़ को हत्या बताते हुए दर्ज कराई गई एफआइआर में एफआर लगाने का निर्णय किया गया है। पुलिस की ओर से दर्ज मामले में चतर सिंह के 2 साथियों को आरोपी माना है। अभी इस पर पुलिस महानिदेशक की मुहर लगना बाकी है।
2016 में हुई थी मुठभेड़
हिस्ट्रीशीटर चतर सिंह की मौत जैसलमेर के सदर थाना क्षेत्र में जून 2016 में हुई थी। जैसलमेर में आगजनी की घटना के बाद पुलिस चतर को तलाश रही थी। सूचना मिली कि वह रामगढ़ की ओर जा रही कार में है तो रामगढ़ थाने के हैड कांस्टेबल भोलाराम व साथी 5 पुलिसकर्मी कार को तलाश रहे थे। इस दौरान मोखला चौराहे पर पुलिस और चतर सिंह का सामना हुआ। वहां मुठभेड़ में चतर सिंह मारा गया।
पुलिस की कहानी सही, दूसरे पक्ष की गलत
घटना को लेकर एक मामला हैड कांस्टेबल भोलाराम ने दर्ज कराया। इसमें आरोप था कि चतर ने भागते समय भोलाराम को खुद की कार में पटक लिया। इस पर साथी पुलिसकर्मियों ने पत्थर फेंके व एक ने टायर पर गोली चलाई। गोली टायर से ऊपर रही, जो चतर को जा लगी।
जबकि चतर पक्ष की ओर से दर्ज रिपोर्ट में आरोप था कि पुलिस ने चतर की हत्या कर मुठभेड़ का रंग दिया। जांच में भोलाराम की रिपोर्ट को सही पाया गया। इसमें एसएलएल की रिपोर्ट भी शामिल की गई, जिसमें गोली 70 से 80 फीट दूर से चलने का अनुमान बताया है। पुलिस महानिदेशक ने इस पर मुहर लगाई तो पुलिस चतर के साथी गणपत सिंह व वेण सिंह के खिलाफ चालान पेश करेगी।
Published on:
22 May 2018 08:41 am
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