
डेबॉक इंडस्ट्रीज लि. के एमडी मुकेश सिंह। फोटो: पत्रिका
जयपुर। डेबॉक इंडस्ट्रीज लि. और उसके एमडी मुकेश सिंह पर सेबी ने 7 साल के लिए प्रतिभूति बाजार में प्रवेश और कारोबार पर रोक लगा दी है। सेबी ने वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में कंपनी और मुकेश सिंह समेत तीन अन्य निदेशकों पर 29 करोड़ रुपए से अधिक का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही 59.30 करोड़ रुपए के अवैध लाभ की वसूली का आदेश दिया है। इस घोटाले में मुकेश के साथ सुनील कालोट, प्रियंका शर्मा और गौरव जैन भी शामिल थे।
फर्जी बिक्री-खरीदः संबंधित कंपनियों के बीच लेनदेन से बिक्री और मुनाफा बढ़ाकर दिखाया। बढ़े हुए वित्तीय आंकड़ों के आधार पर एनएसई मेनबोर्ड में माइग्रेट हुई। फर्जी मुनाफे से बोनस शेयर बांट दिए और राइट इश्यू ले आई।
-वर्ष 2026 में मुकेश सिंह (डेबॉक इंडस्ट्रीज) पर 7 साल बाजार से प्रतिबंध और जुर्माना।
-वर्ष 2012 में पीपल सिंह, अवतार सिंह (एनजीएचआइ डवलपर्स) पर शेयर बाजार में गाजार में प्रवेश और खरीद-बिक्री पर रोक।
-2001 में एचआर खत्री, एनके भूत पर 5 साल पूंजी बाजार से प्रतिबंध। वर्ष 2001 में शंकर लाल पांडया, मूल नाथ, मधुकर जांगिड, संजय पांडया पर 5 साल पूंजी बाजार से प्रतिबंध।
सेबी ने वर्ष 2001 में राजस्थान की कई कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम कंपनियों और उनके अधिकारियों को पांच साल के लिए पूंजी बाजार से प्रतिबंधित किया गया था।
2018: डेबॉक इंडस्ट्रीज ने शेयर बाजार में एंट्री की और कंपनी के शेयरों में कारोबार शुरू हुआ।
2021: कंपनी ने करीब 3 करोड़ कन्वर्टिबल वारंट जारी किए। ये वारंट बाद में शेयरों में परिवर्तित किए जाने थे।
2022: जारी किए गए कन्वर्टिबल वारंट को शेयरों में बदल दिया गया। इसी साल कंपनी की आय में अचानक बड़ा उछाल देखने को मिला। आय 30.78 करोड़ रुपए से बढ़कर 97.37 करोड़ रुपए हो गई।
2022: कंपनी ने एनएसई के मेन बोर्ड पर माइग्रेशन किया, जिससे उसके शेयरों की बाजार में पहुंच और कारोबार का दायरा बढ़ा।
2023: कंपनी ने 1:1 बोनस शेयर जारी किए। इसके साथ ही करीब 49.50 करोड़ रुपए का राइट्स इश्यू भी लाया गया।
2024: एनएसई की जांच के बाद मामला सेबी तक पहुंचा और नियामकीय कार्रवाई शुरू हुई।
28 अगस्त 2026: सेबी ने मामले में अंतिम फैसला सुनाते हुए संबंधित पक्षों पर 7 साल का प्रतिबंध लगाया।
Updated on:
01 Sept 2026 07:20 am
Published on:
01 Sept 2026 07:20 am
