
जयपुर। हड़ताल के दौरान अगुवाई करने वाले सेवारत चिकित्सक संघ पदाधिकारियों के तबादलों को लेकर डॉक्टरों और सरकार के बीच रार बढ़ती जा रही है। तबादलों के विरोध में प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर सेवारत चिकित्सकों का ओपीडी बहिष्कार गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। जबकि चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने फिर दो टूक कहा है कि तबादले प्रशासनिक स्वच्छता के लिए किए गए हैं। धमकियों से सरकार डरती नहीं है। डॉक्टरों ने किसी भी प्रकार अनुशासन तोड़ा तो कार्रवाई की जाएगी।
ट्रोमा ब्लड बैंक के स्थापना दिवस पर गुरुवार को एसएमएस अस्पताल के जेएमए सभागार में हुए समारोह में सराफ ने कहा, संघ की ही मांग थी कि पदाधिकारियों को प्रशासनिक कार्यों से हटाया जाए। इसलिए सरकार ने प्रशासनिक पदों से तबादले किए हैं ताकि वे मरीजों की सेवा कर सकें। ऐसे में उन्हें दिक्कत नहीं होनी चाहिए। ये तबादले प्रशासनिक स्वच्छता के लिए किए गए हैं। कोई आंदोलन की धमकी देता है तो सरकार उस पर कार्रवाई करेगी। ऐसी धमकियों से सरकार डरती नहीं है।
टीबी समीक्षा बैठक का बहिष्कार करने वालों को चार्जशीट
दो दिन पहले सेवारत चिकित्सक संघ के अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी और उपाध्यक्ष डॉ. वर्षा सक्सेना सहित बड़ी संख्या में डॉक्टरों के तबादलों से नाराज डॉक्टरों ने गुरुवार को भी ओपीडी का बहिष्कार किया। वहीं, बुधवार को प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा विभाग) की ओर से राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम की तिमाही समीक्षा के लिए आयोजित वीडियो कांफ्रेंसिंग का कई जिलों में डॉक्टरों ने बहिष्कार किया था। इस पर सख्ती दिखाते हुए विभाग ने गुरुवार को ऐसे चिकित्सकों पर राजकीय सेवा नियमों के तहत कार्यवाही करने का निर्णय किया है। इन चिकित्सकों को 17 सीसी के तहत चार्जशीट दी जा रही है।
प्रभावित रहे मरीज
डॉक्टरों के दो घंटे ओपीडी बहिष्कार से गुरुवार को भी जिला अस्पतालों सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों व अन्य छोटे अस्पतालों में मरीज प्रभावित रहे। इधर, संघ के पदाधिकारी आंदोलन की आगामी रणनीति बनाने में जुटे हैं।
Published on:
30 Nov 2017, 9:07 PM IST
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