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जैसलमेर से दो बार के पूर्व विधायक पंचतत्व में विलीन, भारत विलय में निभाया था अहम रोल; CM भजनलाल ने जताया दुख

Jaisalmer Ex MLA Hukam Singh : जैसलमेर विधानसभा सीट से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करने वाले पूर्व विधायक का निधन हो गया है। सीएम भजनलाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर शोक जताया है।

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Former Maharaja of Jaisalmer Hukam Singh : जैसलमेर के पूर्व महाराजा एवं पूर्व हुकमसिंह का रविवार को 97 साल की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने मंदिर पैलेस स्थित अपने आवास में अंतिम सांसे ली। सीएम भजनलाल शर्मा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दुख जताया है। निधन की खबर से पूरे जैसलमेर जिले में शोक की लहर दौड़ गई है। जैसलमेर के सोनार दुर्ग का भगवे व पीले रंग का रियासत कालीन ध्वज झुक गया। सोमवार को आज महाराज हुकमसिंह का अंतिम संस्कार किया गया।

जैसलमेर के महारावल जवाहरसिंह के शासक बनने से पहले एटा के ठा. मानसिंह के गोद गये थे। उस समय उनका विवाह 1906 ई. में लूणार में हुआ था। 1907 ई. में महाराजकुमार गिरधरसिंह का जन्म हुआ। 1914 ई. में जवाहरसिंह जैसलमेर के राजसिंहासन पर विराजे। जिसके बाद उनके दो अन्य विवाह हुए। लेकिन राजगद्दी पर विराजने के 12 साल बाद तक भी उनके कोई संतान नहीं हुई, जिससे वे चिंतित थे।

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अंत में महारावल ख्याला मठ पधारे महंत श्री शेम्भूनाथ से पुत्र रत्न की इच्छा जाहिर की। महंत ने आशीर्वाद दिया कि नाथ सिंद्धो के हुकम से पुत्ररत्न प्राप्त होगा। उसका नाम हुकमसिंह रखना। नाथसिद्ध योगी शम्भूनाथ जी के वचन फलीभूत हुए। उसके बाद 1927 ई. में हुकमसिंह का जन्म हुआ। यही कारण है कि आज भी भाटी राजवंशज ख्याला मठ के नाथगुरूओं के प्रति अगाध श्रद्धा व विश्वास है।

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पूर्व राजघराना सदस्य हुकम सिंह ने दूसरी और तीसरी विधानसभा में जीत हासिल करके इतिहास रचा। वे पहले नेता थे, जिन्होंने जैसलमेर विधानसभा सीट से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की थी। इसमें भी रोचक जानकारी सामने आई है कि पूर्व राजघराने के सदस्य हुकम सिंह ने पहला चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीता तो दूसरा कांग्रेस के टिकट पर जीते। वहीं छोटू सिंह ने लगातार दो बार भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की।

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हुकमसिंह का जन्म 14 फरवरी 1927 को हुआ। ननिहाल बूंदी के राजघराने में था, डूंगरपुर राजघराने में इनका ससुराल था। हुकमसिंह आगारा विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक की उपाधि प्राप्त थे। हुकम सिंह जैसलमेर के पहले जिला प्रमुख रहे।

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जैसलमेर का विलय जब भारत गणराज्य में रहा था। उस समय हुकमसिंह मात्र 22 साल के थे। इस दौरान अपने बडे भाई महारावल गिरधरसिंह के साथ जैसलमेर की भौगोलिक एवं राजनैतिक विशेषता को देखते हुए भारत के विलय में अपनी सहमति एवं पूर्ण सहयोग जताया था। उस समय सरदार पटेल के साथ चली वार्ताओं में सिंह अपने बड़े भाई महारावल गिरधरसिंह के साथ रहते थे।

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