इससे पूर्व प्रशासन व आंदोलनकारियों के बीच पांच घंटे के दौरान दो बार वार्ता हुई, लेकिन आंदोलनकारियों ने मोहनसिंह सैनी के शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। प्रशासन को डर था कि आंदोलनकारी शव को पड़ाव स्थल पर रख सकते हैं। ऐसे में प्रशासन आंदोलनकारियों से आश्वासन चाहता था कि वे शव को मोर्चरी से ले जाकर अंतिम संस्कार करेंगे, लेकिन इसको लेकर सहमति नहीं बन रही थी। देर रात मामला सुलझ गया। इधर, हाईवे स्थित गांव अरोदा में नौ दिन से आंदोलनकारियों का कब्जा बना हुआ है। इससे वाहनों को भी वैकल्पिक मार्ग से होकर निकलना पड़ रहा है।