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देर शाम तक करते रहे फोन का इंतजार, नहीं बजी घंटी, तो हुए मायूस

हनुमान बेनीवाल और किरोडीलाल के पास नहीं बने मंत्री
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जयपुर

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Pushpendra Singh Shekhawat

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Updated: 30 May 2019, 8:15 PM IST

Hanuman beniwal and kirodilal meena

देर शाम तक करते रहे फोन का इंतजार, नहीं बजी घंटी, तो हुए मायूस

जयपुर।narendra modi cabinet list 2019 की गुरुवार शाम होते—होते तस्वीर साफ हो गई। इससे राजस्थान में कई बड़े नेताओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया। इन्हीं नामों में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ( hanuman beniwal ) और दौसा सांसद किरोड़ीलाल मीणा ( Kirodi Lal Meena ) भी है। जिन्हें मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले मंत्रिमंडल में शामिल होने की पूरी उम्मीद थी। सूत्रों के अनुसार बेनीवाल और मीणा दोनों देर शाम तक फोन आने का इंतजार करते रहे। वहीं राजस्थान से इस बार 3 सांसदों को मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल होने का मौका मिला है। इनमें बीकानेर सांसद अर्जुन राम मेघवाल ( Arjun Ram Meghwal ), जोधपुर सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत ( gajendra singh shekhawat ) और बाड़मेर सांसद कैलाश चौधरी ( Kailash Choudhary ) हैं।

समर्थकों ने चलाया सोशल मीडिया पर कैम्पेन
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल को मंत्री बनाए जाने को लेकर राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया में चर्चाएं तेज थी। उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर कैम्पेन भी चला रखा था। लेकिन शाम होते होते समर्थकों को निराशा हाथ लगी।

मैंने नहीं की मांग

गौरतलब है कि मोदी सरकार में मंत्री बनने के सवाल पर बेनीवाल ने कहा था कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( PM Narendra Modi ) पर निर्भर करता है कि वह मंत्री बनाए या नहीं बनाएं। मैंने ऐसी कोई मांग नहीं की है।

राजस्थान की पूरी हुई उम्मीद
राजस्थान ने इस बार भी 2014 की तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पूरे 25 सांसद दिए हैं। ऐसे में चुनाव परिणाम के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि मोदी के पहले मंत्रिमंडल में इस बार राजस्थान से दो या तीन सांसदों को मौका मिल सकता है।

पिछले कार्यकाल में मिला था एक को मौका
मोदी जब पहली बार प्रधानमंत्री बने थे और 46 सदस्यीय मंत्रिमंडल का पहला गठन हुआ था तो 25 सीटें जीतने के बावजूद भी मात्र एक सांसद को ही मंत्री बनाया गया था और वो भी राज्य मंत्री। श्रीगंगानगर से सांसद निहाल चंद मेघवाल ( Nihal Chand Meghwal ) को राज्यमंत्री बनाया गया था और उनको रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया था।