सेहत सुधारो सरकार...प्रसव के बाद बरामदों में पीड़ा बर्दाश्त कर रही प्रसूता

Arun Sharma

Publish: Sep, 16 2017 08:44:58 (IST)

Jaipur, Rajasthan, India
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बस्सी/बगरू संस्करण। एक ओर तो राज्य का चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सरकारी अस्पतालों में प्रसवों की संख्या बढ़ाने के लिए नित नई योजनाएं बनाता है। इन योजनाओं पर करोड़ों रुपए भी व्यय कर रहा है। वहीं ग्रामीण अंचल में चल रहे स्वास्थ्य केन्द्रों में महिला एवं नवजात को मिलने वाली सुविधाओं को नजरअंदाज कर रहे है। जयपुर ग्रामीण में ब्लॉक मुख्यालयों पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर लाखों रुपए खर्च कर ब्लड स्टोरेज कक्ष तो बना दिए, लेकिन निर्बाध बिजली के अभाव में कक्ष शोपीस साबित हो रहे हैं। विधुत कटौती के कारण फ्रिजर का निश्चित तापमान गड़बड़ाने के कारण ब्लड रखना संभव नहीं होने से कक्षों पर ताले लटके हैं, वहीं उपकरण धूल फांक रहे हैं। आपात स्थिति में किसी मरीज को ब्लड की जरूरत होती है, तो चिकित्सकों को मरीज को जयपुर रैफर करना पड़ता है। चौमूं, गोविन्दगढ़ व सामोद ब्लॉक के पांचों राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द इसका उदाहरण हैं। यहां कहीं महिला रोग विशेषज्ञ के अभाव में ग्रामीण महिलाएं निजी अस्पतालों में प्रसव करवाने को मजबूर हो रही हैं, तो कहीं प्रसव के बाद बरामदों में पड़ी पीड़ा बर्दाश्त कर रही हैं। कहीं परिजनों को गर्भवती महिला को लेबर रूम तक लाने-ले जाने की मशक्कत करनी पड़ रही है, तो कहीं नवजात की सारसंभाल भी उनके जिम्मे है। राजस्थान पत्रिका के सेहत सुधारो सरकार अभियान के तहत हुई पड़ताल में ब्लॉक के विभिन्न सीएचसी में ऐसे कई मामले देखने को मिले, जिनमें चिकित्सा विभाग के जननी सुरक्षा योजना का सच सामने आया।

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