विद्युत मंत्रालय के उक्त सर्कुलर के अनुसार हाईटेंशन लाइन का पोल जिसकी जमीन पर खड़ा होगा, उसे डीएलसी रेट के मुताबिक 85 प्रतिशत मुआवजा भुगतान करना होगा। तार खींचने के दौरान उनके नीचे 46 फीट चौड़ाई तक भूमि का डीएलसी रेट का 15 प्रतिशत मुआवजा देना होगा। मंत्रालय के अवर सचिव (पावर) संजीव जैन का कहना है कि सर्कुलर जिस दिन जारी हुआ, उसी दिन लागू भी किया जा चुका है। इधर, ऊर्जा विभाग के अधिकारी यह सर्कुलर दबाकर बैठे हैं। किसानों का कहना है कि मुआवजा देने की बजाय उन्हें धमकाया जा रहा है।