
Jyoti Khandelwal: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के साथ ज्योति खंडेलवाल (फोटो-पत्रिका)
जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 में भाजपा बहुमत की ओर बढ़ रही है, लेकिन इसी बीच पार्टी को एक ऐसी हार मिली है, जिसने सियासी गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। पूर्व महापौर और भाजपा की बड़ी दावेदार मानी जा रहीं ज्योति खंडेलवाल वार्ड नंबर 110 से चुनाव हार गईं। कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता मेठी ने उन्हें शिकस्त दी। खास बात यह रही कि ज्योति खंडेलवाल पहले राउंड से ही पीछे रहीं और आखिरी में हार का सामना करना पड़ा।
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों की मतगणना में भाजपा मजबूत स्थिति में है। भाजपा 68 वार्डों में जीत दर्ज कर चुकी थी, जबकि कांग्रेस 48 और निर्दलीय 14 सीटों पर जीत हासिल कर चुके थे। भाजपा बहुमत के आंकड़े से कुछ ही कदम दूर थी और बोर्ड बनना लगभग तय माना जा रहा था। ऐसे माहौल में ज्योति खंडेलवाल की हार ने भाजपा को बड़ा झटका दिया।
वार्ड 110 इस बार अनारक्षित महिला के लिए निर्धारित था। भाजपा ने यहां ज्योति खंडेलवाल जैसे बड़े राजनीतिक चेहरे पर दांव लगाया था। उनके सामने कांग्रेस ने सुनीता मेठी को उतारा। सुनीता, वार्ड के पूर्व पार्षद अरविंद मेठी की पत्नी हैं।
मुकाबले में शुरुआत से ही सुनीता ने बढ़त बनाए रखी। मतगणना के पहले राउंड में ही ज्योति खंडेलवाल पिछड़ गईं। इसके बाद वह मुकाबले में वापसी नहीं कर सकीं। सबसे बड़ा झटका यह रहा कि हर राउंड में ज्योति खंडेलवाल पिछड़ती गईं और आखिरी में हार गईं। आखिरकार कांग्रेस की सुनीता मेठी ने बाजी अपने नाम कर ली।
ज्योति खंडेलवाल को भाजपा ने सिर्फ एक पार्षद प्रत्याशी के तौर पर मैदान में नहीं उतारा था। जयपुर में उनकी उम्मीदवारी को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा मेयर पद को लेकर थी। इस बार महापौर की सीट अनारक्षित थी और यदि भाजपा बोर्ड बनाती है तो ज्योति को मेयर पद के प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा था। यही वजह है कि वार्ड 110 का परिणाम सामान्य पार्षद चुनाव से कहीं बड़ा राजनीतिक संदेश दे रहा है। ज्योति की हार के बाद भाजपा के मेयर पद के समीकरण भी बदल गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर मौजूद असंतोष, स्थानीय स्तर पर हुए भीतरघात और कांग्रेस की मजबूत घेराबंदी की वजह से उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। इस हार के बाद न केवल भाजपा के मेयर बनाने के समीकरणों को झटका लगा है, बल्कि पार्टी के अंदरूनी गुटबाजी भी अब खुलकर सतह पर आने लगी है। जानकारों का यह भी कहना है कि ज्योति खंडेलवाल कांग्रेस से बीजेपी में आईं थी और पार्टी उनको लगातार तवज्जो दे रही थी। इस बात से स्थानीय स्तर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं में असंतोष था। वहीं सुनीता मेठी के पति अरविंद मेठी वार्ड 110 से पहले भी पार्षद रह चुके हैं, ऐसे में उनके काम पर लोगों ने भरोसा जताया है।
ज्योति खंडेलवाल का राजनीतिक सफर करीब ढाई दशक पुराना है। वर्ष 2005 में वह पार्षद बनीं और इसके बाद वर्ष 2009 के सीधे महापौर चुनाव में भाजपा की सुमन शर्मा को हराकर जयपुर की पहली महिला महापौर बनी थीं।
महापौर के तौर पर ज्योति की पहचान एक सक्रिय और आक्रामक नेता की रही। नगर निगम अधिकारियों से लेकर तत्कालीन विधायकों और मंत्रियों तक से वह सीधे सवाल करने के लिए जानी जाती थीं। निगम में भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर भी उन्होंने कई बार मुखर रुख अपनाया।
ज्योति खंडेलवाल लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहीं। वर्ष 2018 में उन्होंने किशनपोल विधानसभा सीट से टिकट मांगा, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया। वर्ष 2019 में पार्टी ने उन्हें जयपुर शहर लोकसभा सीट से मैदान में उतारा, लेकिन वह चुनाव हार गईं।
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने एक बार फिर किशनपोल से टिकट की दावेदारी की। टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और अक्टूबर 2023 में भाजपा में शामिल हो गईं। माना जा रहा था कि भाजपा उन्हें विधानसभा चुनाव में मौका दे सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
करीब तीन साल बाद भाजपा ने उन्हें नगर निगम चुनाव में वार्ड 110 से उतारा। राजनीतिक तौर पर इसे उनकी वापसी का बड़ा मौका माना जा रहा था। लेकिन जिस चुनाव के बाद उन्हें जयपुर की प्रथम नागरिक बनने की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था, उसी चुनाव में वह अपने वार्ड से ही हार गईं।
ज्योति खंडेलवाल की यह हार इसलिए भी बड़ा झटका है क्योंकि वह महज एक पार्षद प्रत्याशी नहीं थीं, बल्कि भाजपा के संभावित मेयर चेहरों में शामिल थीं। पहले राउंड से लगातार पिछड़ना और जीत नहीं मिलना उनके लिए इस चुनाव का सबसे बड़ा सियासी झटका बन गया है।
Updated on:
14 Sept 2026 05:08 pm
Published on:
14 Sept 2026 04:48 pm
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