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नए जिले की मांग… दोनों ठोक रहे दावेदारी, मिला किसी को भी नहीं

राज्य सरकार के 4 वर्ष पूरे होने पर बुधवार को शाहपुरा को नया जिला बनाने की घोषणा होने की उम्मीद से क्षेत्र में सुबह से ही खुशी का माहौल था।

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New District of Rajasthan

शाहपुरा। राज्य सरकार के 4 वर्ष पूरे होने पर बुधवार को शाहपुरा को नया जिला बनाने की घोषणा होने की उम्मीद से क्षेत्र में सुबह से ही खुशी का माहौल था। झुंझुनूं में आयोजित सभा पूरी होने तक लोग टीवी के सामने टकटकी लगाए बैठे रहे, लेकिन घोषणा नहीं होने से निराशा हाथ लगी। लोगों का कहना है कि जयपुर जिले की शाहपुरा तहसील को जिला बनाने की मांग करीब तीन दशक से की जा रही है। शाहपुरा कस्बा आसपास की तहसीलों का केन्द्र बिन्दु होने से जिले के लिए भौगालिक व प्रशासनिक दृष्टि से भी सभी मापदण्ड पूरे करता है। इस बार शाहपुरा विधायक राव राजेन्द्र सिंह विधानसभा उपाध्यक्ष हैं। इससे लोगों को जिला बनने की पूरी उम्मीद है।

विकास को पंख, बढ़ेगा रोजगार
पूर्व विधायक हनुमान सहाय व्यास, प्रधान नंदलाल गोठवाल, नगरपालिका उपाध्यक्ष रविश खटाणा, जिला बनाओ संघर्ष समिति अध्यक्ष राम सहाय बाज्या, प्रवीण व्यास का कहना है कि नेशनल हाईवे पर बसे शाहपुरा को जिला बनाने पर क्षेत्र का चहुंमुखी विकास होगा। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। शाहपुरा कस्बा कोटपूतली व विराटनगर तहसीलों को जोडऩे वाला केन्द्र बिन्दु है। साथ ही जमवारामगढ़, आमेर के कई गांव, चौमूं व सीकर के श्रीमाधोपुर और अजीतगढ़ से सीधा जुड़ा हुआ है। जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ पर स्थित होने के साथ ही यह जयपुर-अलवर हाईवे से भी जुड़ा हुआ है तथा इसी मार्ग पर विराटनगर उपखण्ड है। दूसरी तरफ नीमकाथाना-खेतड़ी स्टेट हाईवे व दौसा जिला मुख्यालय का भी सीधा जुड़ाव है।

तीन दशक पुरानी मांग
क्षेत्रवासी वर्ष 1989 से शाहपुरा को जिला बनाने की मांग करते आ रहे हैं। तत्कालीन उपमुख्यमंत्री डॉ. कमला ने भी प्रयास किया था। जिला बनाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में क्षेत्रवासी धरना-प्रदर्शन करते आ रहे हैं, लेकिन मांग पूरी नहीं हो सकी।

अधिकांश सरकारी कार्यालय मौजूद
शाहपुरा भौगोलिक दृष्टि से केन्द्र बिंदु पर है। क्षेत्र के विस्तार के लिए यहां करीब ४०० बीघा से अधिक सरकारी भूमि उपलब्ध है। जो जिला बनने पर शाहपुरा के विकास में काम आ सकती है। क्षेत्र में पांच सरकारी महाविद्यालय, रीको औद्योगिक क्षेत्र, डीटीओ कार्यालय, बिजली, पीडब्ल्यूडी और कृषि विभाग के जिला स्तरीय कार्यालय, कृषि मंडी, टिण्डा मंडी मौजूद है। ऐतिहासिक, धार्मिक, प्राकृतिक सौन्दर्य एवं पर्यटन की दृष्टि से भी शाहपुरा और विराटनगर विशिष्टताएं रखते हैं। महाभारतकालीन विराटनगर एवं वहां के बौद्धकालीन स्तूप व शिलालेख, मुगलकालीन इमारतें, प्राचीन जैन मंदिर, अर्जुन के बाण से निकली बाणगंगा, कृष्ण मंदिर, भीम डूंगरी, हनुमान मंदिर, चारों तरफ पर्वत श्रंखलाएं, बीजक पहाड़ी एवं बीजक बांध, शाहपुरा का धार्मिक स्थल त्रिवेणीधाम, तपस्वी संतों के स्थान, परमानन्दजी, देवीमाता एवं जगदीशजी का प्राचीन मंदिर, साहबी नदी की धाराएं, संजय स्मृति वन आदि ऐतिहासिक व धार्मिक स्थान भी क्षेत्र के सौंदर्य के प्रतीक हैं।

मुख्य चौराहे पर जाम लगा कर किया प्रदर्शन
प्रदेश में नए जिलों के गठन में कोटपूतली को शामिल नहीं करने पर पूर्व संसदीय सचिव रामस्वरूप कसाना की अगुवाई में मुख्य चौराहे पर जाम लगा कर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों ने जन प्रतिनिधियों को खरीखोटी सुनाई। पूर्व ससंदीय सचिव ने कहा कि सरकार ने अन्याय के अलावा धोखा किया है। क्षेत्र की जनता इसे सहन नहीं करेगी। मुख्य चौराहे पर जाम से नीमकाथाना मार्ग व सर्विस लेन पर वाहनों की कतार लग गई। उप निरीक्षक दुर्गा प्रसाद व राजेश शर्मा ने समझाकर जाम खुलवाया। लोगों का कहना है कि अब तक गठित आयोग व समितियों की ओर से कोटपूतली भौगोलिक व प्रशासनिक दृष्टि से जिले के सभी मापदण्ड पूरे करता है, लेकिन यह मांग राजनीतिक दांवपेच व आश्वासनों में उलझ कर रह गई। क्षेत्र के लोग वर्ष 1953 से जिले की मांग कर रहे हैं। आजादी से पहले खेतड़ी रियासत के समय भी इसे निजामत जिले का दर्जा प्राप्त था। इस दौरान प्रमोद वशिष्ठ, कमल गुप्ता, सुमेरसिंह दादरवाल, अजय गोयल, कृष्ण कसाना, सरपंच प्रमोद शर्मा, अवनीश यादव, रूपसिंह शेखावत, शैतानसिंह, गोविन्द बीदाणी, लोकेश शर्मा, मुकेश गुरूजी, दीपक सेनी, राजू सैनी, सुरेश रावत, अनिल मंगल , सतवीर रावत, सुरेन्द्र मीणा, अशोक मुकेश सैनी, पांचू कसाना कृष छावड़ी व राजेश यादव आदि उपस्थित रहे।

राजनीतिक नेतृत्व की कमी
राजनीतिक नेतृत्व की कमी व पिछले कई विधानसभा चुनावों से विपक्ष का विधायक चुने जाने से कोटपूतली समय के साथ उतनी तेजी से कदमताल नहीं कर पाया, जितना करना चाहिए था। पिछले छह चुनाव से यहां सत्ता विरोधी विधायक चुना गया है। अब तक चुने गए विधायकों में किसी को भी लगातार दूसरी बार जीतने का अवसर प्राप्त नहीं हुआ है। कांग्रेस के पिछले शासन में रामस्वरूप कसाना संसदीय सचिव बने थे। इसके अलावा कोई विधायक मंत्री नहीं बन पाया। कद्दावार नेता की कमी के चलते क्षेत्र विकास के मामले में राजनीतिक दृष्टि से उपेक्षित रहा है।

आयोग ने की थी सिफारिश
नए जिलों के गठन को लेकर 1980 में हरिशचन्द्र माथुर की अध्यक्षता में गठित समिति ने कोटपूतली को जिला बनाने की मांग की थी। इसके बाद 2006 में परमेश चंद्र आयोग ने भी जयपुर जिले का विघटन कर राजमार्ग पर कोटपूतली को जिला बनाने की सिफारिश की थी। बाद में जेएस सिन्धु की अध्यक्षता में गठित समिति ने भी कोटपूतली को जिला बनाने के पक्ष में रिपोर्ट दी। कांग्रेस के आखिरी बजट में कोटपूतली को जिला बनाने की चर्चा जोरों पर रही थी, लेकिन घोषणा नहीं हुई। भाजपा के पिछले बजट में भी लोगों को उम्मीद अधूरी रह गई।

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अब तक हुए प्रदर्शन व आन्दोलन
कस्बे को जिला बनाने की मांग 1953३ से की जा रही है। तत्कालीन विधायक हजारीलाल शर्मा ने पहली बार कोटपूतली को जिला बनाने की मांग की थी। इसके बाद 1990 मे अभिभाषक संघ ने कई माह तक अदालतों में कार्य बहिष्कार रखा और 1991 के लोकसभा चुनाव में 'जिला नहीं तो मतदान नहीं' का नारा भी दिया। विकास परिषद 18 बार प्रदेश के मुखिया को ज्ञापन दे चुकी है। 1997 में जन शक्ति जिला निर्माण संघर्ष समिति ने 85 दिन तक धरना दिया। वैद्य बालाबक्स शास्त्री की अगुवाई में २००३ में जिला निर्माण संघर्ष समिति की ओर से आजाद चौक में धरना दिया गया। वर्ष 2009 से अब तक जिला निर्माण समग्र विकास समिति के संयोजक हीरालाल भूषण की अगुवाई में 65 ज्ञापन सरकार को भेजे गए हैं। पंचायत समिति व पालिका की बैठकों में भी प्रस्ताव पारित किए गए। सामाजिक संगठनों ने भी मांग की है। पिछले कांग्रेस शासन में निर्दलीय विधायक रामस्वरूप कसाना विधानसभा में कई बार मुद्दा उठा चुके हैं। कांग्रेस के मौजूदा विधायक राजेन्द्र यादव, भाजपा विधानसभा क्षेत्र प्रभारी बनवारी यादव, भाजपा नेता मुकेश गोयल, पालिका अध्यक्ष महेन्द्र सैनी, देहात अध्यक्ष यादराम जांगल, नगर अध्यक्ष कैलाश पंसारी व जिला प्रतिनिधि सुरेश मोठूका भी प्रयासरत हैं।

इनका कहना है..
नए जिलों के दावेदार में कोटपूतली सबसे अग्रणी रहा है, लेकिन केबिनेट के प्रस्ताव में शामिल नहीं कर क्षेत्र के लोगों के हितों की अनदेखी की है। उन्होंने फोन कर विरोध जताया है। क्षेत्र के लोगों को एकजुट होकर संघर्ष करने की जरूरत है।
राजेन्द्र सिंह यादव विधायक, कोटपूतली