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Jaipur: नाहरगढ़ टाइगर सफारी में 15 दिन में दूसरी बार गूंजी किलकारी…लगातार बढ़ रहा बाघों का कुनबा

Nahargarh Tiger Safari: जयपुर में नाहरगढ़ जैविक उद्यान स्थित टाइगर सफारी से 15 दिन में दूसरी खुशखबर सामने आई है। यहां बाघिन चमेली ने एक शावक को जन्म दिया है। इससे पहले गत दिनों बाघिन भक्ति दो शावकों को जन्म दे चुकी है।

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नाहरगढ़ जैविक उद्यान, पत्रिका फाइल फोटो

नाहरगढ़ जैविक उद्यान, पत्रिका फाइल फोटो

Nahargarh Tiger Safari: जयपुर में नाहरगढ़ जैविक उद्यान स्थित टाइगर सफारी से 15 दिन में दूसरी खुशखबर सामने आई है। यहां बाघिन चमेली ने एक शावक को जन्म दिया है। इससे पहले गत दिनों बाघिन भक्ति दो शावकों को जन्म दे चुकी है। इसके साथ ही उद्यान में शावकों की कुल संख्या बढ़कर 3 हो गई है। इतनी जल्दी सौगातें मिलने का यह पहला ही मामला बताया जा रहा है। वन अधिकारियों के अनुसार, बाघिन चमेली ने अलसुबह शावक को जन्म दिया। फिलहाल शावक अपनी मां के साथ सुरक्षित एनक्लोजर में है और दोनों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अरविंद माथुर और उनकी टीम लगातार निगरानी कर रही है। गौरतलब है कि इससे पहले बाघिन भक्ति ने भी दो शावकों को जन्म दिया था, लेकिन उसने बाद में दोनों को खुद से अलग कर दिया। ऐसे में दोनों शावकों को वेटरनरी अस्पताल में विशेष निगरानी में रखा गया है, जहां उनकी देखभाल की जा रही है।

वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह

लगातार मिल रही इन खुशखबरों से वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह है। उनका कहना है कि यह सफलता बेहतर देखभाल, अनुकूल वातावरण और विशेषज्ञों की सतत निगरानी का परिणाम है। आने वाले समय में इससे संरक्षण प्रयासों को और मजबूती मिलेगी। उद्यान में पर्यटक जल्द ही नन्हे शावकों का दीदार भी कर सकेंगे।

15 दिन में दूसरी खुशखबर

नाहरगढ़ जैविक उद्यान में मादा बाघिन 'भक्ति' ने बीते 18 अप्रेल को दो स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। जन्म के बाद विशेष परिस्थितियों के चलते शावकों को चिकित्सकीय देखरेख में रखा गया है।
उप वन संरक्षक (वन्यजीव) चिड़ियाघर जयपुर विजय पाल सिंह के अनुसार जन्म के बाद लंबे समय तक बाघिन द्वारा शावकों को दूध नहीं पिलाने पर पशु चिकित्सकीय बोर्ड के निर्णय के अनुसार दोनों शावकों को मां से अलग किया गया। इसके बाद उन्हें तुरंत उद्यान के पशु चिकित्सालय में संचालित नियोनेटल केयर यूनिट में शिफ्ट किया गया।

शावकों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद पशु चिकित्सा दल द्वारा उनकी देखभाल शुरू की गई। शावकों को उपनिदेशक डॉ. अरविंद कुमार माथुर की निगरानी में रखा गया है। उद्यान प्रशासन ने शावकों की देखभाल के लिए 3 कर्मचारियों की विशेष ड्यूटी लगाई है।