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Rajasthan Mining News: ‘राजस्थान में अवैध खनन धड़ल्ले से जारी- सरकारी निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल’, जानिए क्या है बड़ी खबर?

NGT Order on Rajasthan Mining: |राजस्थान में धड़ल्ले से जारी अवैध खनन पर एनजीटी सख्त। निगरानी तंत्र को बताया पूरी तरह विफल, ड्रोन तकनीक अपनाने और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश।
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जयपुर

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Nakul Devarshi

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Updated: 24 Oct 2026, 9:09 AM IST

ngt strict order on illegal sand mining monitoring in rajasthan

NGT strict order on illegal mining

राजस्थान के नदी-नालों, ग्रामीण अंचलों और खनिज समृद्ध क्षेत्रों में लंबे समय से धड़ल्ले से जारी अवैध रेत व बजरी खनन के काले कारोबार पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने कड़ा और सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने प्रदेशभर में पसरते अवैध खनन के जाल पर गहरी चिंता जताते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा है कि तमाम अदालती आदेशों और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के बावजूद राजस्थान में अवैध खनन बेरोक-टोक जारी है और इससे निपटने में राज्य का मौजूदा निगरानी तंत्र पूरी तरह विफल साबित हुआ है। न्यायाधिकरण ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को पूर्व में जारी की गई पर्यावरण सुरक्षा गाइडलाइंस की शत-प्रतिशत कड़ाई से पालना सुनिश्चित करने के सख्त आदेश दिए हैं।

न्यायिक सदस्य शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की दो सदस्यीय बेंच ने 'नेशनल नेचर सोसायटी एवं अन्य' से जुड़े मामले में यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। एनजीटी ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) और जिला स्तरीय प्राधिकरण (DEIAA) द्वारा अपनाई जा रही मौजूदा मॉनिटरिंग व्यवस्था को अपर्याप्त और नाकाम करार दिया। बेंच ने निर्देश दिए कि राज्य में रेत और बजरी खनन की पारदर्शी और प्रभावी निगरानी के लिए एक विशेष और संशोधित निगरानी तंत्र तुरंत स्थापित किया जाए।

एनजीटी ने 2019 के आदेश को दोहराया, गाइडलाइंस का पालन अनिवार्य

न्यायाधिकरण ने 5 अप्रैल 2019 को जारी अपने पुराने ऐतिहासिक आदेश का हवाला देते हुए राज्य सरकार को याद दिलाया कि अवैध खनन पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट, विस्तृत खनन योजना, पुनर्भरण अध्ययन और पर्यावरण मंजूरी की शर्तों का कड़ाई से पालन होना अनिवार्य है।

इसके साथ ही एनजीटी ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी 'सस्टेनेबल सैंड माइनिंग गाइडलाइंस, 2016' (SSCMG-2016) और 'एनफोर्समेंट एंड मॉनिटरिंग गाइडलाइंस फॉर सैंड माइनिंग, 2020' (EMGSM-2020) में बताए गए सभी सुरक्षा उपायों को राज्य में जमीन पर लागू किया जाए। ये नियम खनिज स्रोत की पहचान करने से लेकर उसके अंतिम उपयोग तक पारदर्शी निगरानी सुनिश्चित करते हैं।

अवैध खनन पर ब्रेक लगाने के लिए NGT के 5 कड़े निर्देश

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने राजस्थान में पर्यावरण की हो रही भारी क्षति को रोकने और खनन माफियाओं पर शिकंजा कसने के लिए पांच प्रमुख बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए हैं:

  1. वाहनों की जब्ती और मुआवजे की वसूली: अवैध खनन और परिवहन में लिप्त पाए जाने वाले सभी वाहनों और मशीनों को तुरंत जब्त किया जाए तथा उनसे पर्यावरणीय क्षति मुआवजे की वसूली की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
  2. ड्रोन और जीआईएस (GIS) तकनीक का इस्तेमाल: रेत व बजरी के वास्तविक भराव और खनन की मात्रा का सटीक अनुमान लगाने के लिए मानव रहित विमानों (ड्रोन) और जीआईएस आधारित डिजिटल एप्लिकेशन का उपयोग किया जाए, जिससे अवैध खनन की पल-पल की लोकेशन ट्रैक हो सके।
  3. अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय हो: जिस भी क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारियों या खान विभाग के कर्मियों की लापरवाही और निष्क्रियता के कारण अवैध खनन होगा, राज्य सरकार उन संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी (Personal Accountability) तय कर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करे।
  4. पर्यावरण नुकसान का आकलन और पेनल्टी: राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए गए हैं कि जिन मामलों में एफआईआर (FIR) दर्ज हो चुकी है और अदालती कार्यवाही चल रही है, उनमें पर्यावरण को पहुंचे पारिस्थितिकी नुकसान का वैज्ञानिक आकलन कर भारी जुर्माना वसूला जाए।
  5. बहु-स्तरीय ऑनलाइन निगरानी: पर्यावरण मंजूरी (EC) मिलने के बाद की प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए नियमित पर्यावरण लेखा परीक्षा (Environmental Audit) और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से खनिजों की बिक्री-खरीद पर पारदर्शी नजर रखी जाए।

राजस्थान में माफियाओं के बुलंद हौसलों पर कसेगा शिकंजा

राजस्थान के बनास, लूनी, चंबल और अन्य नदी घाटियों में अवैध बजरी खनन लंबे समय से एक गंभीर पर्यावरणीय और सामाजिक मुद्दा बना हुआ है। कई इलाकों में खनन माफियाओं द्वारा प्रशासनिक टीमों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। एनजीटी द्वारा अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय करने और तकनीक के इस्तेमाल के आदेश के बाद अब पुलिस, खान विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों पर ढिलाई न बरतने का भारी दबाव रहेगा।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एनजीटी के इन पांचों निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाता है, तो प्रदेश में न न केवल नदियों के प्राकृतिक स्वरूप को बचाया जा सकेगा, बल्कि अवैध खनन पर भी काफी हद तक लगाम लग सकेगी। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां एनजीटी के इस सख्त रुख के बाद धरातल पर क्या ठोस कदम उठाती हैं।

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