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जयपुर. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) विभाग में हुए बहुचर्चित रिश्वतकांड में जांच एजेंसी की ओर से अदालत में पेश की गई चार्जशीट से भ्रष्टाचार का डिजिटल और व्यवस्थित 'बहीखाता' सामने आया है।
चार्जशीट के अनुसार, सरकारी टेंडरों और बिल पास कराने के एवज में वसूल की जाने वाली रिश्वत की राशि का बहीखाता एक्सेल में मेंटेन किया जाता था। इसमें 'बॉस' के नाम से अलग शीट थी, जिसमें घरेलू खर्च, लग्जरी कार की किस्तें, ब्रांडेड कपड़ों की शॉपिंग, फ्लाइट टिकट, यहां तक कि उनके के मोबाइल फोन तक का भुगतान इसी 'कमीशन मनी' से किया जाता था। एसीबी ने 'बॉस' के नाम से दर्ज खर्च को आईएएस नीरज के पवन का माना है। मामले के मुख्य बिचौलिए (आरोपी) अजीत कुमार सोनी से 18 मई 2016 को दी जब्त पैन ड्राइव की विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की जांच में डिलीट और छिपाया गया डेटा बरामद हुआ। एफएसएल रिपोर्ट के अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि बिचौलिया अजीत सोनी आईईसी विभाग में पदस्थापित लोकसेवक तत्कालीन निदेशक नीरज कुमार पवन, तत्कालीन मुख्य लेखाधिकारी दीपा गुप्ता, तत्कालीन अतिरिक्त निदेशक अनिल अग्रवाल, तत्कालीन स्टोर कीपर जोजी पी. वर्गीस और अन्य कर्मचारियों के लिए कमीशन वसूलने का 'रूटीन कोर्स' में पूरा लेखा-जोखा रखता था। चार्जशीट के मुताबिक, आईईसी विभाग में टेंडर लेने वाली फर्मों से उनके कार्यादेश और बिल भुगतानों के बदले 17 प्रतिशत तय कमीशन लिया जाता था।
चार्जशीट का सबसे गंभीर पहलू एनएचएम के तहत चलाए जाने वाले 'आरोग्य रथ' (एलईडी प्रचार वाहन) से जुड़ा है। ठेकेदार सुनील राठौड़ को टेंडर दिलवाने और बिना काम किए बिल पास करवाने के लिए बिचौलिए के जरिए अधिकारियों को 30.65 लाख की रिश्वत दी गई। अक्टूबर से दिसंबर 2015 के दौरान आरोग्य रथों के भ्रमण के बिना ही फर्जी तस्दीक और फर्जी हस्ताक्षर तैयार कर 1,00,95,086 का कुल बिल प्रस्तुत किया गया और बिना किसी कटौती के पूरा भुगतान उठा लिया गया।
तकनीकी सबूतों, एफएसएल जांच रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट, गवाहों के बयानों के आधार पर आरोप साबित हुए हैं। सुनील राठौड़ के खिलाफ चार्जशीट दायर हुई है। उसने आरोग्य रथ में तीस लाख की रिश्वत अन्य आरोपियों को दी और खुद ने 70 लाख का फायदा उठाया है।
- भंवर सिंह चौहान, विशेष लोक अभियोजक
Updated on:
30 Aug 2026, 11:41 AM IST
Published on:
30 Aug 2026, 11:40 AM IST
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