
वर्षा जाखड़ (Photo-Patrika)
जयपुर. रात के दो बजे थे...घर सो रहा था, लेकिन छठी कक्षा से हॉस्टल में रहकर पढ़ाई के साथ हैंडबॉल खेलने वाली वर्षा जाखड़ के सपने जाग रहे थे। जयपुर जाकर हैंडबॉल खेलने की जिद थी।
बेटी खेलना चाहती थी, समाज को चिंता थी कि लोग क्या कहेंगे। पिता भी पहले तैयार नहीं थे। अकादमी में ट्रायल देने के लिए उसने पिता से अनुमति मांगी तो उन्होंने साफ मना कर दिया। लेकिन डीडवाना-कुचामन जिले के छोटे से गांव जाखड़ो का बास की किसान परिवार की बेटी वर्षा जाखड़ ने शायद 'लोग क्या कहेंगे' वाली किताब पढ़ी ही नहीं थी। वर्षा ने हार मानने के बजाय पिता विजय कुमार जाखड़ को मनाने की ठान ली।
रात दो बजे तक उन्हें समझाती रही और आखिरकार अनुमति मिलने के बाद सुबह जयपुर के लिए निकल पड़ी। ट्रायल दिया, चयन हुआ और यहीं से उसकी जिंदगी ने करवट ली। डीडवाना-कुचामन के छोटे से गांव जाखड़ो का बास की यह बेटी आगे चलकर राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची। समाज की रोक-टोक पीछे छूटी और हाथ में तिरंगा लेकर बहुत आगे निकल गई।
वर्षा की बड़ी बहन भी नेशनल हैंडबॉल खिलाड़ी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। पिता की तबीयत भी खराब रहती थी, फिर भी उन्होंने पांचों बच्चों की पढ़ाई जारी रखी। धीरे-धीरे परिवार ने बेटियों के सपनों पर भरोसा किया।
2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वर्षा को कजाकिस्तान के अल्माटी में 16वीं एशियन जूनियर चैंपियनशिप खेलने जाना था। विदेश भेजने को लेकर भी लोगों ने पिता को डराया। वर्षा ने कोच मनीषा राठौड़ से उनकी बात कराई। पिता ने भरोसा जताया और बेटी को खेलने भेजा। भारतीय महिला टीम ने स्वर्ण पदक जीता और विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया। आज वर्षा राजस्थान पुलिस में सेवाएं दे रही हैं। वह अपनी सफलता का श्रेय परिवार और कोच मनीषा राठौड़ को देती हैं।
Updated on:
30 Aug 2026 12:20 pm
Published on:
30 Aug 2026 12:18 pm
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