
जयपुर . स्मोकिंग को सांस या फेफड़ों संबंधित बीमारियों का कारण समझा जाता है, लेकिन ये हार्ट को भी उतना ही नुकसान पहुंचाता है। आज के दौर में युवाओं में बढ़ती स्मोकिंग की लत के कारण वे हार्ट अटैक के शिकार हो रहे हैं। बुढ़ापे में होने वाला हार्ट अटैक अब युवाओं में तेजी से फैल रहा है। एक्सपट्र्स का मानना है कि हार्ट अटैक की शिकायत वाले मरीजों में 50 से 80 प्रतिशत स्मोकिंग की लत वाले होते हैं।
युवा स्मोकर्स को ज्यादा खतरा
स्मोकिंग के कारण युवा अवस्था मे हार्ट अटैक के केस लगातार बढ़ रहे हैं। स्मोकिंग से खून की नलियां सिकुड जाती हैं, जिससे इनमें ब्लॉकेज आ जाते हैं। स्मोकिंग के कारण अनेक युवा हार्ट पेशेंट्स को जान से हाथ भी धोना पड़ता है। सिर्फ हार्ट अटैक ही नहीं स्मोकिंग से दिमाग और हार्ट में क्लॉट, पैर की छोटी धमनियों में रूकावट जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। वहीं स्मोकिंग करने वाले व्यक्ति के पास बैठने से सामान्य व्यक्ति को उससे ज्यादा खतरा होता है। स्मोकिंग ना करने वाले व्यक्ति की सांस की नली स्मोकिंग करने वाले व्यक्ति की अपेक्षा मुलायम होती है ऐसे में उसपर निकोटीन का असर ज्यादा होता है जो घातक साबित होता है।
कारण
स्मोकिंग करने वालों की धड़कन सामान्य लोगों से ज्यादा धड़कती है। तम्बाकू में मौजूद निकोटीन से उन्हें स्मोकिंग की इच्छा करती है और स्मोकिंग के कुछ देर बाद उनका बीपी और धड़कन की रफ्तार भी बढ़ जाती है। इससे दिल और धमनियों में दबाव बढ़ता है और अटैक की संभावना बढ़ जाती है। सिगरेट में कार्बन मोनोऑक्साइड, आर्सेनिक, हाइड्रोजन, सिनानाइड, अमोनिया, लेड, एक्टेलडेहाइड सहित पांच हजार से ज्यादा टॉक्सिक केमिकल होते हैं।
डॉ. सुप्रिय जैन, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट ने कहा कि स्मोकिंग करने वाले व्यक्ति को तो खतरा है, लेकिन उसके पास बैठने वाले सामान्य व्यक्ति को उससे ज्यादा खतरा होता है। स्मोकिंग ना करने वाले व्यक्ति की सांस की नली स्मोकिंग करने वाले व्यक्ति की अपेक्षा मुलायम होती है। जिससे खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।
Published on:
11 May 2018 05:02 pm
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