
पत्रिका न्यूज नेटवर्क/जयपुर। Rajasthan Election 2023: मुख्यमंत्री अशाेक गहलोत ने विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले शुक्रवार को तीन जिले और बनाने की घोषणा कर राजनीतिक स्ट्राेक मारा है। इन तीन जिलों में से दो के लिए हाल ही बनाए गए नए जिलों का कुछ एरिया भी लिया जाएगा। कुचामन जिले को डीडवाना-कुचामन से अलग किया जाएगा, वहीं मालपुरा जिले के लिए टोंक के साथ ही केकड़ी जिले का कुछ हिस्सा लिया जा सकता है। इन नए जिलों से अजमेर व सीकर संभाग की तस्वीर बदलने की भी संभावना है।
राजनीति के लिहाज से देखा जाए तो अब इन तीन जिलों की घोषणा को कांग्रेस भुनाएगी ताकि आने वाले चुनाव में पार्टी को इसका सियासी फायदा मिल सके। इन नए जिलों को लेकर शुक्रवार को राजस्व विभाग ने भी प्रक्रिया शुरू कर दी। बताया जाता है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में गठित कमेटी इन जिलों की सीमाओं को तय करेगी, उसके बाद ही नए जिलों के गठन की अधिसूचना जारी हो पाएगी।
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नए जिलों की तस्वीर
मालपुरा
- टोंक जिले से अलग होगा
- कस्बे की आबादी करीब 45000
- इन क्षेत्रों से मिलकर बनेगा जिला
मालपुरा नगरपालिका क्षेत्र व उपखण्ड की 35 ग्राम पंचायत, टोडारायसिंह नगरपालिका क्षेत्र, टोंक की 9 ग्राम पंचायत तथा टोडारायसिंह उपखण्ड की 11 पंचायतों को शामिल किया जाना संभावित है।
वर्तमान स्थिति- यहां सन् 1947 से नगरपालिका और ब्रिटिशकाल से न्यायालय स्थापित है। इनके अलावा यहां एसडीएम कार्यालय व अन्य विभागीय कार्यालयों के साथ एएसपी कार्यालय भी है।
कुचामन
- नवसृजित डीडवाना-कुचामन जिले से अलग होगा।
- आबादी करीब 11 लाख है
यह क्षेत्र शामिल होने की संभावना
- नावां, परबतसर एवं मकराना विधानसभा क्षेत्र।
सुजानगढ़
- वर्तमान में चूरू जिले में है।
-सुजानगढ़ शहर की आबादी करीब एक लाख 70 हजार है।
- लंबे समय से जिला बनाने की मांग थी, 100 साल पहले जिला था।
राजनीतिक समीकरणों पर भी आएगा असर
मालपुरा: दाे दशक से नहीं जीत पा रही कांग्रेस
मालपुरा सीट पर दो दशक से कांग्रेस का उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया। आखिरी बार 1998 में कांग्रेस से डॉ चन्द्रभान चुनाव जीते थे और वे तब गहलोत सरकार में मंत्री भी बने थे। इसके बाद के चार चुनाव में यहां से कांग्रेस विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाई। अबकी बार कांग्रेस जिला बनाने का फायदा लेने की कोशिश करेगी। वर्तमान में कन्हैयालाल चौधरी विधायक हैं, जो भाजपा से हैं और लगातार दूसरी बार निर्वाचित हुए हैं।
कुचामन: डीडवाना को मुख्यालय बनाने से थी नाराजगी
डीडवाना को डीडवाना-कुचामन जिले का मुख्यालय बनाने से कुचामन क्षेत्र के लोग नाराज थे और विरोध जता रहे थे। नावां के विधायक महेन्द्र चौधरी ने इस बारे में मुख्यमंत्री से बात भी की थी। अब नावां सीट कुचामन जिले में आएगी। नावां सीट पर चौधरी दूसरी बार विधायक बने और अभी उप मुख्य सचेतक है। इस सीट पर 2008 से अब तक एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा का विधायक बनता आया है।
सुजानगढ़: 1985 से एक बार कांग्रेस एक बार भाजपा
सुजानगढ में अभी दिवंगत भंवरलाल मेघवाल के पुत्र मनोज मेघवाल विधायक हैं। वे उपचुनाव में विधायक बने थे। इस सीट का इतिहास है कि 1985 से अब तक एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा चुनाव जीत रही है। यहां विश्व प्रसिद्ध तालछापर कृष्ण मृग अभयारण्य हैं। इसके अलावा सिद्धपीठ सालासर बालाजी मंदिर है।
Published on:
07 Oct 2023 09:38 am
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