
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Photo- Patrika)
जयपुर. नगरीय निकाय चुनाव के लिए टिकट बांटने की प्रक्रिया ने भाजपा और कांग्रेस में राजनीतिक सक्रियता और नेतृत्व को लेकर एक नई चर्चा शुरू कर दी है। 27 अगस्त से लेकर नामांकन के आखिरी दिन तक टिकटों को लेकर दोनों ही दलों में लगातार बैठकों और मंथन का दौर चला। इस पूरी कवायद के दौरान दोनों पार्टियों की प्रदेश स्तर पर टिकट तय करने की प्रक्रिया मुख्य रूप से दो-दो नेताओं के आसपास ही दिखाई दी।
भाजपा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने लगातार बैठकें कीं और अलग-अलग वार्डों के दावेदारों के नामों पर चर्चा की। वहीं, कांग्रेस में प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली टिकट वितरण की प्रदेश स्तरीय प्रक्रिया में सक्रिय नजर आए। दोनों दलों में टिकट तय करने के दौरान इन नेताओं की सक्रियता साफ तौर पर दिखाई दी।
इसी बीच भाजपा और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की प्रदेश स्तर पर चल रही टिकट प्रक्रिया से दूरी भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। टिकट वितरण की इस पूरी कवायद ने दोनों दलों में फिलहाल सक्रिय नेतृत्व के केंद्र को लेकर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है।
भाजपा में टिकट वितरण के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ की सक्रियता सबसे ज्यादा रही। प्रदेश कार्यालय में संभागवार बैठकों से लेकर वार्डवार दावेदारों पर मंथन तक दोनों लगातार प्रक्रिया में शामिल रहे। इसे संगठन और सरकार के मौजूदा नेतृत्व की चुनावी रणनीति पर पकड़ के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सांसद सतीश पूनियां और अन्य कुछ बड़े नेता प्रदेश कार्यालय की टिकट कवायद में नजर नहीं आए। पूनियां इस दौरान हरियाणा और पंजाब के दौरों में व्यस्त रहे।
कांग्रेस में प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने टिकट वितरण की प्रदेश स्तरीय प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाई। जिलावार प्रभारियों के साथ लगातार बैठकें हुईं और कई जगह दावेदारों को लेकर खींचतान भी सामने आई।
दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी जयपुर में मौजूद रहने के बावजूद प्रदेश स्तरीय टिकट मंथन में प्रमुख भूमिका में नजर नहीं आए। अंतिम मंथन के दौरान गहलोत प्रतापगढ़ में जन आक्रोश यात्रा महारैली में थे। राष्ट्रीय महासचिव जितेन्द्र सिंह और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट दिल्ली में मौजूद रहे। पायलट मंगलवार को बाड़मेर-बालोतरा दौरे पर रहेंगे। इन नेताओं की दूरी के राजनीतिक मायने पर चर्चा जरूर है।
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Updated on:
01 Sept 2026 11:57 am
Published on:
01 Sept 2026 11:57 am
