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जयपुर। निकाय चुनाव के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ने पंचायत चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। भाजपा वोट प्रतिशत और स्थानीय स्तर पर सामने आई कमियों को दूर करने में जुटी है, जबकि कांग्रेस बोर्ड गठन में हुई गुटबाजी और फ्लोर मैनेजमेंट की कमजोरियों से सबक लेकर प्रदेश स्तर से निगरानी बढ़ाने पर विचार कर रही है। प्रदेश में दो-तिहाई निकायों में भाजपा अपने बोर्ड बनाने में भले ही कामयाब हो गई, लेकिन पार्टी के वोट प्रतिशत से केंद्रीय नेतृत्व संतुष्ट नहीं है।
निकाय चुनावों में नजर आई कमियों को पंचायत चुनाव में सुधारने के लिए सत्ता-संगठन ने मोर्चा संभाल लिया है। संगठन स्तर पर जहां सियासी समीकरणों का गुणा-भाग होने लगा है वहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी अपने दौरों में मोर्चा संभाल लिया है। पिछले 4-5 दिनों से वे जिलों के दौरों के साथ-साथ खुद संगठनात्मक बैठकों को भी संबोधित कर रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी अपने दौरों में युवाओं से संवाद बढ़ा रहे है।
पंचायत चुनावों में जातिगत समीकरण, स्थानीय मुद्दे और कार्यकर्ताओं को सक्रिय व एकजुट रखकर आगे बढ़ना चुनौती होती है। कोशिश की जा रही है कि सरकार की योजनाओं का असर और संगठन की ताकत मिलकर ग्रामीण इलाकों में पार्टी के वोट बैंक को मजबूत कर सके।
मुख्यमंत्री 26 सितंबर को प्रतापगढ़ एवं उदयपुर, 27 को श्रीगंगानगर-सूरतगढ़, सोमवार को अलवर-खैरथल तिजारा और मंगलवार को कोटा-झालावाड़, किशनगढ़ के दौरे पर रहे। इन दौरों में विकास कार्यों के शिलान्यास-लोकार्पण के बाद उन्होंने संगठनात्मक बैठकें भी लीं और पंचायत चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की। सीएम का बुधवार को बाड़मेर, जोधपुर और पाली का दौरा प्रस्तावित है। इन बैठकों में स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों से चुनावी तैयारियों का फीडबैक लिया जाएगा। साथ ही बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और संभावित प्रत्याशियों को लेकर भी चर्चा होगी।
नगरीय निकाय चुनाव में पार्षदों की संख्याबल के हिसाब से कई जगह बेहतर स्थिति के बावजूद बोर्ड नहीं बना पाने वाली कांग्रेस अब पंचायत चुनावों की रणनीति में बदलाव की तैयारी में है। ज्यादा चिंता फ्लोर मैनेजमेंट को लेकर है। विचार यह हो रहा है कि अब टिकट वितरण से लेकर पंचायत समितियों व जिला परिषदों के गठन तक स्थानीय स्तर पर निर्भरता के बजाय प्रदेश संगठन स्तर से निगरानी बढ़ाई जाए। पंचायत चुनाव में भी पूरी व्यवस्था जिलाध्यक्षों, विधायकों सांसदों और विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी रहे नेताओं के भरोसे छोड़ी गई तो गुटबाजी और खींचतान का असर फिर सामने आ सकता है।
अब तक टिकट वितरण से लेकर बोर्ड गठन तक स्थानीय नेताओं को बड़ी भूमिका मिलती रही है। प्रदेश स्तर से सीमित दखल के कारण कई जिलों में टिकट को लेकर विवाद हुए। चुनाव बाद बोर्ड गठन में भी कुछ जगह क्रॉस वोटिंग हुई।
कांग्रेस के सामने पंचायत चुनाव में केवल सीटें जीतने की नहीं, बल्कि जीतने वाले सदस्यों को एकजुट रखकर पंचायत समितियों और जिला परिषदों में सत्ता बनाने की बड़ी चुनौती होगी।
पंचायत चुनाव में प्रदेश जाएगी। विधानसभा क्षेत्रों के साथ ही अब पंचायत समिति स्तर पर भी पर्यवेक्षक लगाने पर विचार किया जा रहा है।
-स्वर्णिम चतुर्वेदी, मीडिया चेयरपर्सन, प्रदेश कांग्रेस
Updated on:
30 Sept 2026 07:32 am
Published on:
30 Sept 2026 07:30 am
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