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Rajasthan Politics: क्या एक मंच पर आएंगे रविंद्र सिंह भाटी और हनुमान बेनीवाल? अचानक क्यों हो रही ऐसी चर्चा?

राजस्थान की राजनीति में क्या हनुमान बेनीवाल और रविंद्र सिंह भाटी आएंगे साथ? सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं हैं।
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Hanuman Beniwal and Ravindra Singh Bhati

Hanuman Beniwal and Ravindra Singh Bhati - File PIC

राजस्थान की सियासत इन दिनों एक बार फिर अपनी अनोखी और दिलचस्प चालों के चलते चर्चा के केंद्र में है। राज्य की सियासत में गरमाए कई विषयों और मुद्दों के बीच एक चर्चा और शुरू हो गई है, कि क्या दो आक्रामक तेवर वाले नेता, शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के नेता हनुमान बेनीवाल, आने वाले समय में एक मंच पर साथ आएंगे? दरअसल, इस चर्चा को हवा तब मिली जब एक इंटरव्यू के दौरान हनुमान बेनीवाल के भाई, आरएलपी नेता और पूर्व विधायक नारायण बेनीवाल से रविंद्र सिंह भाटी के ईडब्ल्यूएस (EWS) पर चल रहे आंदोलन और यात्रा को लेकर सवाल पूछा गया। इस सवाल के जवाब में नारायण बेनीवाल ने इशारों-इशारों में ही सही, लेकिन भाटी को एक खुला और सकारात्मक राजनीतिक 'ऑफर' दे दिया है।

'सबको मिलकर लड़नी चाहिए लड़ाई'

नारायण बेनीवाल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी हर उस अच्छे मुद्दे और व्यक्ति के साथ खड़ी है जो जनहित की बात करता है। उन्होंने कहा कि जब व्यवस्था में समानीकरण की बात आती है और सब लोगों को समान अधिकार देने की बात है, तो इसमें पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज के समय में ऊर्जा अलग-अलग दिशाओं में बंट रही है, जिससे इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "आज जिस तरह की लड़ाई है, हम सबको मिलकर लड़नी चाहिए। रविंद्र सिंह भाटी को पता होना चाहिए कि हनुमान बेनीवाल जैसा लड़ाका कहीं नहीं है, तो सब भाई-भाई मिलकर क्यों नहीं लड़ते?"

नारायण बेनीवाल ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर कब तक प्रदेश में जातियों के नाम पर वोट बटोरने का खेल चलता रहेगा, और अब समय आ गया है कि सही ऊर्जा का इस्तेमाल एक मंच पर आकर किया जाए।

राजपूत समाज और युवाओं के बीच बढ़ती चर्चा

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए नारायण बेनीवाल ने कहा कि उम्र और जवानी हमेशा एक जैसी नहीं रहती, और अब वे खुद जीवन के एक अलग पड़ाव यानी तीसरे आश्रम में प्रवेश कर चुके हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भले ही कई बार वैचारिक भिन्नताएं रही हों, लेकिन राजपूत समाज के लोग भी यह मानते हैं कि राजस्थान में हनुमान बेनीवाल जैसा सड़क पर संघर्ष करने वाला दूसरा कोई नेता नहीं है।

उनका मानना है कि यदि राजस्थान का वास्तविक भला करना है, तो कुछ राजनीतिक त्याग करने होंगे और वैचारिक दूरियों को मिटाकर साथ आना होगा। यदि नेता थोड़ा त्याग करेंगे, तो जनता खुद-ब-खुद उनके साथ मजबूती से जुड़ेगी।

कांग्रेस और बीजेपी से तंग आ चुकी है जनता

नारायण बेनीवाल के इस बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ये दोनों युवा चेहरे भविष्य में हाथ मिलाते हैं, तो यह राजस्थान की मुख्यधारा की राजनीति यानी कांग्रेस और बीजेपी के सामने एक बड़ा विकल्प बनकर उभर सकता है।

उन्होंने कहा कि आज राजस्थान की जनता दोनों पारंपरिक दलों से तंग आ चुकी है और राज्य में एक बड़े राजनीतिक बदलाव की अपार संभावनाएं (पोटेंशियल) मौजूद हैं। हालांकि, देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में इन चर्चाओं को मैदानी सियासत की जमीन पर कौन सा नया आकार मिलता है।