
आरोपी संगीता कड़वासरा (फोटो-पत्रिका)
जयपुर। फर्जी डिग्रियों के खेल ने एक इंटरनेशनल वॉलीबॉल प्लेयर को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। यह कहानी किसी फिल्मी सस्पेंस जैसी लगती है, जहां एक इंटरनेशनल चैंपियन खिलाड़ी, रेलवे कर्मचारी और फिर पत्रकार रह चुकी महिला आखिरकार डिग्री माफिया की अहम कड़ी बन बैठी।
संगीता का सफर चौंकाने वाला है। कभी SAF खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली यह खिलाड़ी खेल कोटे से रेलवे में भर्ती हुई थी। लेकिन 2014 में निजी कारणों से नौकरी छोड़ दी। इसके बाद बहन सरिता के जरिए रोहतक के एक न्यूज चैनल से जुड़ीं और फिर चूरू के राजगढ़ स्थित OPJS यूनिवर्सिटी में पर्यवेक्षक बनीं।
यहीं से खेल शुरू हुआ। जांच में सामने आया कि विश्वविद्यालय के मालिक जोगेंद्र सिंह के साथ मिलकर संगीता ने हजारों डिग्रियां बैक डेट में जारी करवाईं। इन डिग्रियों के बदले उम्मीदवारों से लाखों रुपए वसूले गए। खासकर बी.एड, बी.पी.एड और एमएससी कृषि जैसे कोर्स की डिग्रियां धड़ाधड़ बेची गईं।
अब एसओजी 2013 से अब तक जारी हुई करीब 43 हजार से ज्यादा डिग्रियों की जांच कर रही है। जनवरी में इसी मामले में विश्वविद्यालय के अकाउंटेंट सुमित जाट को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल, संगीता को जयपुर लाकर कोर्ट में पेश किया जाएगा। माना जा रहा है कि उसकी गिरफ्तारी से इस पूरे फर्जीवाड़े की कई नई परतें खुलेंगी।
राजस्थान एटीएस को उसकी तलाश लंबे समय से थी। आरोपी संगीता कड़वासरा पर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित था, लेकिन वह इतनी चालाकी से छिपी रही कि उसे पकड़ने के लिए अधिकारियों को इलेक्ट्रीशियन का भेष धरना पड़ा।
दरअसल, एटीएस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि संगीता दिल्ली के कंझावला इलाके में अपने भांजे के साथ किराए के फ्लैट में रहती है। वह घर से बाहर लगभग नहीं निकलती थी। बस सुबह-सुबह मंदिर जाना ही उसकी दिनचर्या का हिस्सा था। यही जानकारी एटीएस के लिए सबसे बड़ा सुराग बनी।
टीम ने पहले इलाके की निगरानी की और फिर शनिवार शाम बड़ा दांव खेला। फ्लैट की बिजली काट दी गई। जैसे ही संगीता ने बिजली न आने की शिकायत की, उसका भांजा केयर टेकर को बुलाने गया। उसी समय एटीएस की टीम इलेक्ट्रीशियन बनकर फ्लैट में घुसी और बिना शोर-शराबे के संगीता को पकड़ लिया।
Published on:
26 Aug 2025 02:11 pm
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