
गदग. श्री राजस्थान जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ के तत्वावधान में स्टेशन मार्ग स्थित पाश्र्वनाथ जैन मंदिर परिसर में चातुर्मास के पावन अवसर पर विराजित साध्वी हर्षपूर्णा, साध्वी प्रियनंदिता, साध्वी विनयप्रभा, साध्वी गीतार्थप्रभा एवं साध्वी सिद्धार्थप्रभा की प्रेरणा से निगोद निवारण तप का शुभारंभ किया गया। इस आध्यात्मिक तप अभियान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं संघ के सदस्य उत्साहपूर्वक सहभागी बन रहे हैं।धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी हर्षपूर्णा ने कहा कि तप साधना का अत्यंत महत्वपूर्ण उपक्रम है, जिसका उद्देश्य आत्मा पर बंधे कर्मों की निर्जरा कर उन्हें क्षीण करना है। उन्होंने कहा कि तप केवल शरीर को कष्ट देने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति का प्रभावी साधन है। तपस्या से आत्मा और शरीर दोनों की शुद्धि होती है तथा मनुष्य के भीतर समता, संयम और सहनशीलता का विकास होता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी शारीरिक क्षमता और प्राणशक्ति का आकलन कर ही तप का संकल्प लेना चाहिए। वर्तमान समय में तपस्या का महत्व स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बढ़ा है, क्योंकि अनेक शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं में संयमित तप लाभकारी सिद्ध हो रहा है। तपस्वी का आत्मबल, संतों की प्रेरणा और परिवार का सहयोग—इन तीनों के समन्वय से ही कठिन तप साधना सफल हो पाती है।साध्वी हर्षपूर्णा ने कहा कि प्रत्येक तपस्वी दृढ़ मनोबल और अटूट संकल्प के साथ तप के मार्ग पर अग्रसर होता है। तपस्या आत्मकल्याण, आत्मविजय और अंतत: मोक्ष की ओर बढऩे की प्रथम एवं सबसे महत्वपूर्ण सीढ़ी है।
Updated on:
07 Aug 2026 06:01 am
Published on:
07 Aug 2026 06:01 am
