
घोड़े मेरे सच्चे साथी, मेरी सफलता में उनका भी योगदान: दिव्यकृति सिंह राठौड़
दिव्यकृति सिंह राठौड़, संडे गेस्ट एडिटर
जयपुर. मेरे तीनों घोड़े मेरे सच्चे साथी हैं। मेरा ज्यादातर टाइम इन्हीं के साथ रहता है। पिछले दो साल से घर से दूर जर्मनी में प्रेक्टिस कर रही हूं, आसान नहीं हैं, घर से दूर रहकर खुद को मजबूत रखना। बचपन से पैरेंट्स ने आगे बढ़ाया है। मेरे पापा विक्रम सिंह राठौड़ पोलो खेलते थे, तो घुड़सवारी मुझे विरासत में मिली है। हालांकि घोड़ों से लगाव कॉलेज में रहा, वहां से मैंने घुड़सवारी सीखी और इसी को कॅरियर के रूप में चुन लिया।
मैंने अपनी असफलताओं से सीखा है
घुड़सवारी में अब लड़कियां भी आगे आ रही हैं। हालांकि बहुत महंगा खेल है, इसमें महिला और पुरुष दोनों साथ खेलते हैं। शुरुआत में मेरे सामने कई तरह की चुनौतियां आईं। असफलता मिली, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। जब आप सफल होते हैं, तो सब साथ होते हैं, लेकिन जब असफल होते हैं तो परिवार का साथ ही आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। माता-पिता को बच्चों की असफताओं को स्वीकार करके आगे बढ़ना सिखाना चाहिए।
Updated on:
22 Dec 2023 12:49 pm
Published on:
25 Nov 2023 11:55 am
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