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सावन का सत्कार…….लोगो द्वापर युग से प्राचीन है भूतेश्वर महादेव

जयपुर

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Newsdesk

Aug 07, 2026

Rajasthan

गुढ़ाचंद्रजी. राजा मोरध्वज की नगरी गढ़मोरा में प्राचीन किले में विराजमान भगवान भूतेश्वर महादेव का इतिहास द्वापर युग से मिलता है। सावन माह में यहां पूजा अर्चना के लिए भीड़ लगी है। अकाल मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप और अनुष्ठान भक्त कर रहे हैं। भूतेश्वर महादेव मंदिर में महामृत्युंजय मंत्र जाप व अनुष्ठान का विशेष फल मिलता है। पुजारी मुनीम नाथ ने बताया कि यह इकलौता मंदिर है जहां भगवान भोलेनाथ महामृत्युंजय रूप में विराजमान है। इसलिए सावन में यहां लोगों की भीड़ रहती है। हरिद्वार, सौरोंजी, नारायणी माता, ओढ़ी धाम आदि स्थानों से कांवड़ लाकर गंगाजल महादेव को अर्पित किया जा रहा है। बुजुर्ग बताते हैं कि इस मंदिर की शिल्प कला भी अद्वितीय है। मंदिर एक विशाल पत्थर पर निर्मित है। मंदिर की शिवलिंग पर एक निशान है जो सूर्य की दिशा के अनुरूप रंग बदलता है। कहते हैं यहां जल चढ़ाए बिना चार धाम यात्रा पूर्ण नहीं होती। महादेव को जल अर्पित करने से चार धाम की यात्रा के बराबर फल मिलता है। राजा मोरध्वज ने द्वापर युग में भूतेश्वर महादेव की पूजा की थी। बुजुर्ग बताते हैं कि राजा मोरध्वज ने गढ़मोरा में किला बनाया था। इसके बाद यह शिवलिंग चबूतरे पर था। जिस पर राजा मोरध्वज ने मंदिर बनवाया। मंदिर प्राचीन होने के साथ द्वापर युग की कलाकृतियां मौजूद है। मंदिर में सावन के महीने के साथ महाशिवरात्रि पर भक्तों का मेला लगता है।


फोटो गुढ़ाचंद्रजी. गढ़मोरा गांव में किले पर सजी भूतेश्वर महादेव की झांकी।