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Rajasthan Politics: ‘मैंने अभी इस्तीफा नहीं दिया, सिर्फ संकेत दिए’, विश्वेंद्र सिंह के बयान से कांग्रेस में हड़कंप

Vishvendra Singh Resign Update : विश्वेंद्र सिंह ने साफ किया कि उन्होंने कांग्रेस आलाकमान को पत्र जरूर लिखा है, जिसमें उन्होंने अपनी पीड़ा और असंतोष जाहिर करते हुए अपने इस्तीफे के संकेत दिए थे।
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vishvendra singh resigns from congress rajasthan political crisis 2

Vishvendra Singh - File PIC

राजस्थान कांग्रेस में मचे सियासी घमासान के बीच पूर्व मंत्री और दिग्गज नेता विश्वेंद्र सिंह के रुख को लेकर एक नया और दिलचस्प मोड़ सामने आ गया है। सोशल मीडिया पर उनके इस्तीफे की खबरों और 'अलविदा' संदेश के वायरल होने के बाद खुद विश्वेंद्र सिंह ने मीडिया के सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने अभी अपनी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि अपने त्यागपत्र के 'संकेत' दिए थे। उनके इस स्पष्टीकरण के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार फिर से गर्म हो गया है, खासकर यह जानने के लिए कि आने वाले घंटों में उनका अगला कदम क्या होगा।

'मैंने सिर्फ इस्तीफे के संकेत दिए'

मीडिया से बातचीत करते हुए विश्वेंद्र सिंह ने साफ किया कि उन्होंने कांग्रेस आलाकमान को पत्र जरूर लिखा है, जिसमें उन्होंने अपनी पीड़ा और असंतोष जाहिर करते हुए अपने इस्तीफे के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा कि वे इस पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखने के लिए देर शाम तक एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे, जिसमें कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

सिंह ने अपनी बात रखते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया और कहा कि वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में उन बाहरी या पैराशूट नेताओं पर निशाना साधा जो हाल ही में सक्रिय हुए हैं। उन्होंने कहा, "मेरा साफ कहना है कि कल आए लोग मुझे नहीं चला सकते, वो क्या मेरे खिलाफ रिपोर्ट देंगे?"

'सबको पता है भरतपुर में किसने दिलाई थी जीत'

पार्टी के भीतर सांगठनिक मामलों और हालिया हार-जीत पर खुलकर बोलते हुए विश्वेंद्र सिंह ने अपनी ताकत और योगदान की याद दिलाई। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि सबको अच्छी तरह पता है कि भरतपुर में लोकसभा चुनाव किसने जिताया था और संजना जाटव की जीत के पीछे किसकी मेहनत थी।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जब विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार मिली थी, उसके कुछ महीनों बाद ही जब कांग्रेस को विजय मिली, तब सचिन पायलट के अलावा प्रचार में कोई बड़ा नेता मैदान में नहीं आया था। उन्होंने दोहराया कि उन्होंने अपना पत्र आलाकमान को भेजकर अपनी बात पूरी स्पष्टता से रख दी है।

सचिन पायलट ने की मनाने की कोशिश!

इधर, इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस खेमे में हलचल तेज हो गई है। अंदरखाने से आ रही खबरों के अनुसार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने विश्वेंद्र सिंह से फोन पर बातचीत की है। सूत्रों का कहना है कि पायलट ने नाराज चल रहे दिग्गज नेता को मनाने और उनकी गिले-शिकवे दूर करने की कोशिश की है। चूंकि विश्वेंद्र सिंह और सचिन पायलट के संबंध पहले से बेहद प्रगाढ़ रहे हैं, इसलिए पायलट के दखल के बाद सियासी समीकरणों में क्या बदलाव आता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

पत्र में छलका दर्द

कांग्रेस अध्यक्ष को भेजे गए अपने त्यागपत्र में विश्वेंद्र सिंह ने तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पार्टी की मौजूदा कार्यसंस्कृति पर कड़े प्रहार किए हैं। उन्होंने पत्र में लिखा कि जिस पार्टी के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन न्यौछावर कर दिया, यदि आज उसी पार्टी में निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता का यह सिला मिलता है, तो वह अंदर से पूरी तरह हिल गए हैं।

उन्होंने अपने संदेश में साफ तौर पर लिखा कि उनके सार्वजनिक जीवन का हर कतरा उनके मतदाताओं, क्षेत्रवासियों और प्रदेश के मेहनतकश कार्यकर्ताओं के लिए समर्पित रहा है। विश्वेंद्र सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि यदि सच को सच कहना और गलत का साथ न देना गुनाह है, तो वह इस उसूल पर हमेशा कायम रहेंगे।

उन्होंने अपने त्यागपत्र में लिखा, "ऐसी परिस्थिति में घुटन से घुट-घुट कर मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर है। मेरे पुरखों ने कभी ऐसी चीजों से समझौता नहीं किया, और उनका अनुसरण करते हुए मैं भी आपको अलविदा कहने में ही अपनी भलाई समझता हूं।"

ये लिखा पोस्ट में

''आदरणीय अध्यक्ष महोदय,मैंने जीवन मे हमेशा मेरे इष्ट गिरिराज महाराज और अंतरात्मा की आवाज़ सुन कर ही फैसला लिया है आज कुछ छुटभैये तथाकथित नेताओं ने जो अनर्गल बयान दिए हैं उस से मेरे कार्यकर्ताओं में आक्रोश है,मेरा भी अन्तर मन दुखी और व्यथित है जिस पार्टी के लिए मैंने मेरा जीवन न्यौछावर कर दिया आज उसी पार्टी ने यदि मेरी निष्ठा, ईमानदारी, कर्तव्य परायणता का यह सिला दिया तो मैं अंदर से बहुत हिल गया हूं,मैंने हमेशा मान, सम्मान और स्वाभिमान से जीवन जिया है मेरे उसूल और आदर्शों से कभी कोई समझौता नहीं किया,मेरे कार्यकर्ताओं में मौजूदा चापलूसी की परंपरा के कारण आक्रोश है,यदि सच को सच कहना, गलत और झूंठ का साथ नहीं देना पाप है तो मैं इसको हर बार करूंगा,मैं ना गलत करता हूं न ही गलत सहन करता हूं,मेरा सार्वजनिक जीवन जनता जनार्दन की देन है,मैं इनके लिए ही जीता हूं और इनके लिए ही मरूंगा,मेरे खून का हर कतरा मेरे कार्यकर्ताओं,मेरे मतदाताओं, मेरे क्षेत्र वासियों, प्रदेश वासियों के लिए बहा है,और बहेगा,मेरा सार्वजनिक जीवन खुली किताब है, बेदाग है,मैंने मेरे दामन पर कभी दाग न तो लगने दिया और ना ही लगने दूँगा,ऐसी परिस्थिति में दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर है,मेरे पुरखों ने कभी ऐसी चीजों से कभी समझौता नहीं किया उनका अनुसरण करते हुए मैं भी आपको अलविदा कहने में ही अपनी भलाई समझता हूं,मैं शायद अब आपकी गलत रीति नीति के साथ कदमताल नहीं कर पाउंगा!'' गिरिराज महाराज की जय, जय हिंद, जय भारत

भरतपुर के नतीजों से खफा थे विश्वेन्द्र


विश्वेन्द्र सिंह ने एक पोस्ट में लिखा, 'डीग जिला अध्यक्ष ने डीग के 40 वार्डों में से 5 वार्ड में टिकिट का वितरण किया,गलत टिकिट वितरण के कारण पांचों वार्डों के परिणाम की शर्मनाक स्थिति इस प्रकार है। इस शर्मनाक परिणाम पे मंथन करने के वजाह डीग जिला अध्यक्ष कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की बड़बारी कर रहा है।'

कांग्रेस प्रत्याशियों का रिजल्ट वार्ड नंबर

1- हेमराज सैनी- 243 वोट

10 - प्रियकेश- 14 वोट

12 -बच्चू सिंह मीणा- 56 वोट

34 - राजेंद्र प्रसाद- 86 वोट

37 - सोहनलाल भारती - 10 वोट

'भरतपुर-डीग कांग्रेस का बंटाधार - जिम्मेदार कौन?

विश्वेन्द्र सिंह ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, 'भरतपुर-डीग कांग्रेस का बंटाधार - जिम्मेदार कौन? नगर निकाय में कांग्रेस की हार का एक ही कारण है - दोनों जिलाध्यक्षों ने चहेतों को टिकट बांटे और असली कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया। जनता ने सबक सिखा दिया।पहले निकाय चुनावों में जनता को इन लोगों ने कब्र में दफ़नाया था,लेकिन जनता भी तैयार बैठी है,इस बार चुनाव में जनता इन दोनों जिलाध्यक्षों और इनको बचाने वाले प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को उसी कब्र में दफनाने के लिए तैयार है।'

'ये CM का गृह जिला है, यहाँ कांग्रेस मजबूत होनी चाहिए थी, पर इन लोगों ने पार्टी को डुबो दिया और प्रदेश अध्यक्ष मूक-बधिर बना बैठा है।जब तक ये दोनों कुर्सी पर हैं, कांग्रेस का उठना नामुमकिन है। प्रदेश नेतृत्व होश में आओ!'

डोटासरा पर साधा सीधा निशाना

विश्वेन्द्र सिंह ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, ''श्रीमान डोटासरा जी की हकीकत... 2018 में भर्ती 2016 में डोटासरा जी की पुत्रवधू प्रतिभा पूनिया और पुत्रवधू के भाई गौरव पूनिया, बहिन प्रज्ञा पूनिया को इंटरव्यू में सभी रिश्तेदारों को समान 80-80 अंक दिये गये। प्रतिभा पूनिया RAS-2016 में चयनित हुई, गौरव पूनिया व प्रज्ञा पूनिया 2018 में चयनित हुए।सत्ता का दुरुपयोग करके साक्षात्कार में अंक दिलाये गये, सभी के समान अंक आना गंभीर संदेह पैदा करता है।साथ ही डोटासरा जी के पुत्र अविनाश सिंह का 2016 में RAS में चयन हुआ, उसमें OBC प्रमाण पत्र नॉन क्रीमी लेयर का बनवाकर लाभ लिया गया। डोटासरा के समधी रमेश चंद पूनिया भी क्रीमी लेयर होते हुए उनके बच्चों को OBC का लाभ दिलाया गया।इन सब की गहनता से जांच होनी चाहिए। डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहते हुए REET परीक्षा में बड़ी धांधली हुई जिससे गरीब किसानों के मेहनती बच्चों का भविष्य गर्त में धकेल दिया गया। मैं वर्तमान सरकार और मुख्यमंत्री जी से निवेदन करता हूँ कि डोटासरा जी के विरुद्ध गहनता से जांच कर कार्यवाही करें जिससे कि युवाओं का भरोसा सरकार के प्रति कायम रहे।''

''डोटासरा जी ने बयाना में स्वर्गीय बृजेन्द्र सपा जी के मूर्ति अनावरण कार्यक्रम में कहा था कि "भरतपुर में तो रास्ता पूछने के भी पैसे ले लेते हैं" तो भरतपुर की जनता जनार्दन के इस अपमानजनक वक्तव्य पर मेरा कहना है कि अगली बार डोटासरा जी भरतपुर पधारें आपको रास्ता भी बताया जाएगा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभान जी से बढ़िया स्वागत-सत्कार भी किया जाएगा।''

''ऐसे भ्रष्ट नेताओं को तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा दे देना चाहिए या कांग्रेस पार्टी के आलाकमान को इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करके इन्हें पार्टी से निकाल देना चाहिए।''

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