2 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Rajasthan Politics: क्या विश्वेन्द्र सिंह के इस्तीफे से कांग्रेस को पंचायती राज चुनाव में होगा नुकसान?

विश्वेंद्र सिंह ने फिलहाल कांग्रेस पार्टी से इस्तीफ़ा देने के संकेत दिए हैं। अगर इस्तीफा होता है तो कांग्रेस पार्टी को आने वाले समय में भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है:
3 min read
Google source verification
vishvendra singh resigns from congress rajasthan political crisis

Vishvendra Singh - File PIC


राजस्थान में पंचायती राज चुनाव से ऐन पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कद्दावर नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेन्द्र सिंह ने वर्षों पुराना 'हाथ' का साथ छोड़ने और इस्तीफा देने के संकेत दिए। उनकी ओर से शुक्रवार को सुबह-सुबह की गई सोशल मीडिया पोस्ट ने जैसे हड़कंप मचा दिया। पिछले कुछ दिनों से उनकी पोस्ट, तीखे बयान और पीसीसी चीफ के खिलाफ सीधे हमलों ने कांग्रेस पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को एक बार फिर खुलकर सार्वजनिक मंच पर ला दिया।

सोशल मीडिया के माध्यम से अपने 'मन की बात' साझा करते हुए विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की कार्यप्रणाली और पार्टी की वर्तमान दशा पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। सिंह ने अपने त्यागपत्र में साफ शब्दों में कहा है कि पार्टी में व्याप्त चापलूसी की परंपरा और गलत नीतियों के कारण उनका दम घुट रहा था, और ऐसे माहौल में घुट-घुट कर जीने के बजाय स्वाभिमान के साथ अलग होना बेहतर है।

राजस्थान कांग्रेस में क्यों खास है विश्वेंद्र सिंह का सियासी कद?

विश्वेंद्र सिंह केवल एक आम राजनेता नहीं हैं, बल्कि वे पूर्वी राजस्थान (मत्स्य और ब्रज क्षेत्र) के सबसे प्रभावशाली और वजनदार चेहरों में गिने जाते हैं। उनके बड़े राजनीतिक कद के पीछे कई मुख्य कारण हैं:

भरतपुर राजघराने की विरासत: विश्वेंद्र सिंह भरतपुर के पूर्व राजपरिवार से ताल्लुक रखते हैं, और इस क्षेत्र की आम जनता में आज भी राजपरिवार के प्रति गहरा सम्मान है, जिसे उन्होंने अपने राजनीतिक प्रभाव में बदला है।

जाट और किसान वर्ग में मजबूत पकड़: राजस्थान की सियासत में जाट वोट बैंक को किंगमेकर माना जाता है। विश्वेंद्र सिंह की छवि एक मुखर जाट नेता की है और भरतपुर, डीग, धौलपुर तथा अलवर जैसे जिलों के मतदाताओं पर उनका सीधा असर है।

गुटबाजी से ऊपर उठकर प्रभाव: साल 2020 के राजनीतिक संकट के दौरान वे सचिन पायलट खेमे के साथ रहे थे, लेकिन उनका कद ऐसा रहा है कि कांग्रेस के किसी भी धड़े ने उन्हें कभी नजरअंदाज नहीं किया।

जीत की अचूक क्षमता: डीग-कुम्हेर विधानसभा सीट पर उनकी पकड़ मजबूत होने के साथ-साथ वे आसपास की कई सीटों पर भी उम्मीदवारों को जिताने की कुब्बत रखते हैं।

इस्तीफे से कांग्रेस को कितना और क्या नुकसान?

विश्वेंद्र सिंह ने फिलहाल कांग्रेस पार्टी से इस्तीफ़ा देने के संकेत दिए हैं। अगर इस्तीफा होता है तो कांग्रेस पार्टी को आने वाले समय में भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है:

पूर्वी राजस्थान में संगठन का कमजोर होना: भरतपुर और डीग को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, लेकिन विश्वेंद्र सिंह के जाने से यहां का सांगठनिक ढांचा बिखर सकता है और पार्टी नेतृत्वहीन हो सकती है।

जाट वोट बैंक में बड़ी सेंध: गोविंद सिंह डोटासरा शेखावाटी से आते हैं जबकि विश्वेंद्र सिंह पूर्वी राजस्थान के सर्वमान्य जाट नेता हैं। उनके जाने से पार्टी के भीतर अंदरूनी क्षेत्रीय कलह और बढ़ सकती है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा।

चुनावी समीकरणों पर असर: पूर्वी राजस्थान की करीब 20 से 25 विधानसभा सीटों पर इस घटनाक्रम का सीधा असर पड़ेगा, जहां कांग्रेस के लिए सामाजिक समीकरण साधना कठिन हो जाएगा।

निकाय चुनाव में हार और डोटासरा पर गंभीर आरोप

हाल ही में संपन्न हुए राजस्थान शहरी निकाय चुनावों में भरतपुर और डीग जिले में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद से ही पार्टी के भीतर आंतरिक कलह सतह पर आ गई थी।

पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने इस हार के लिए सीधे तौर पर दोनों जिलों के कांग्रेस जिलाध्यक्षों और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि संगठन के लचर और पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया गया और केवल चहेतों को टिकट बांटे गए।

इसके साथ ही, उन्होंने डोटासरा पर गंभीर व्यक्तिगत आरोप लगाते हुए कहा कि जब वे शिक्षा मंत्री थे, तब उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने रिश्तेदारों को आरएएस (RAS) इंटरव्यू में अनुचित लाभ पहुंचाया। उन्होंने रीट (REET) परीक्षा और ओबीसी प्रमाणपत्र से जुड़े मामलों की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए डोटासरा से इस्तीफे की मांग की है।

कांग्रेस का पलटवार

दूसरी ओर, गोविंद सिंह डोटासरा और उनके समर्थक नेताओं ने विश्वेंद्र सिंह द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पार्टी को कमजोर करने का प्रयास और बीजेपी का टूलकिट करार दिया है। बहरहाल, इस हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम के बाद से राजस्थान की सियासत में गर्मी बढ़ गई है।

बड़ी खबरें

View All

जयपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग