
जैसलमेर. हिंगलाज मंदिर जीवणीयाई में आयोजित गरबा उत्सव में पहुंची युवतियां।
जैसलमेर. गरबा के घेरे में घूमते कदम अब केवल नृत्य की लय तक सीमित नहीं रहे, महिलाओं की बदलती भूमिका की तस्वीर भी सामने ला रहे हैं। नवरात्र के आयोजनों में महिलाएं प्रतिभागी के रूप में शामिल होने के साथ आयोजन की तैयारियों, मंच संचालन और व्यवस्थाओं के समन्वय जैसी जिम्मेदारियों में भी भागीदारी निभा रही हैं। उत्सव का यह स्वरूप परंपरा और आधुनिक सामाजिक सहभागिता के बीच एक नया जुड़ाव दिखाता है। गरबा स्थलों पर परिवारों के साथ पहुंचती महिलाएं उत्सव को सामूहिक अनुभव में बदलती हैं। यहां नृत्य के साथ परिचितों से मुलाकात, नए लोगों से संवाद और अलग-अलग आयु वर्ग के बीच मेलजोल के अवसर बनते हैं। महिलाओं के लिए यह घर और कामकाज की दिनचर्या से अलग अपनी रुचियों के लिए समय निकालने और सार्वजनिक गतिविधियों में शामिल होने का अवसर भी है।
गरबा का आयोजन केवल संगीत और नृत्य तक सीमित नहीं रहता। इसके पीछे समय-सारणी बनाने, प्रतिभागियों के साथ समन्वय, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का क्रम तय करने और व्यवस्थाओं को संभालने जैसे कई काम होते हैं। इन जिम्मेदारियों में महिलाओं की भागीदारी उन्हें योजना बनाने, संवाद करने और सामूहिक निर्णय लेने का व्यावहारिक अनुभव देती है। मंच संचालन जैसी भूमिका में कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाना, दर्शकों से संवाद बनाए रखना और समय का ध्यान रखना शामिल है। यह सार्वजनिक मंच पर आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति को मजबूत करने का अवसर बन रहा है।
परिवारों के साथ गरबा में शामिल होने से उत्सव कई पीढिय़ों को एक जगह लाता है। बच्चे, युवा और बड़े एक साझा सांस्कृतिक गतिविधि का हिस्सा बनते हैं। महिलाओं के लिए यह सामाजिक संपर्क बढ़ाने, पुरानी जान-पहचान को मजबूत करने और नए संबंध बनाने का अवसर है। सामूहिक गतिविधियों में भागीदारी से समुदाय के भीतर संवाद की जगह भी बनती है।
-संगठन क्षमता: तैयारियों और व्यवस्थाओं के समन्वय में जिम्मेदारी निभाने का अवसर।
-संवाद कौशल:मंच संचालन और प्रतिभागियों से संपर्क के जरिए अभिव्यक्ति का अभ्यास।
- निर्णय प्रक्रिया: कार्यक्रम की जरूरतों के अनुसार सामूहिक चर्चा और समाधान में भागीदारी।
- सामाजिक जुड़ाव: परिवारों और विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के साथ संवाद के नए अवसर।
- आत्मविश्वास: सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने का अनुभव।
सामाजिक सहभागिता और नेतृत्व क्षमता के सामान्य सिद्धांतों के अनुसार, योजना बनाना, जिम्मेदारी साझा करना, संवाद करना और समूह के साथ निर्णय लेना नेतृत्व के महत्वपूर्ण पहलू हैं। सांस्कृतिक आयोजन इन क्षमताओं के अभ्यास का अवसर दे सकते हैं।
-डॉ. नीलम जोशी, सामाजिक कार्यकर्ता
Updated on:
16 Oct 2026 08:28 pm
Published on:
16 Oct 2026 08:27 pm
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