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JAISALMER NEWS- राजस्थान सरकार का यह विभाग इन्हें नहीं मानता दिव्यांग या फिर कुछ ओर है माजरा, जानिए हकीकत

- सबसे कम पंजीयन और आईडी जारी करने में जैसलमेर अव्वल
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जैसलमेर

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Jitendra Kumar Changani

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Updated: 25 Apr 2018, 11:54 AM IST

Jaisalmer patrika

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जैसलमेर. आमजन के साथ दिव्यांगों के लिए भी ऑनलाइन पोर्टल व्यवस्था कारगर साबित नहीं हो रही है। राजस्थान में दिव्यांगों को घर बैठे अपना पंजीयन करवाने के लिए वेबपोर्टल व्यवस्था की गई है, लेकिन यह व्यवस्था दिव्यांगों के लिए सुविधाजनक कम और दुविधा जनक अधिक बन गई है। हालात यह है कि वेबपोर्टल पर पंजीयन करवाने के बाद भी 85.9 फीसदी आवेदनकर्ताओं को आाईडी जारी नहीं हो पाई है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में दिव्यांगों को योजनाओं का लाभ पाने के लिए कितना अधिक संघर्ष करना पड़ रहा होगा।
अंतिम पायदान पर जैसलमेर
दिव्यांगों को मिल रहे योजनाओं के लाभ की दृष्टी में ऑनलाइन किए गए सर्वे में जैसलमेर जिला पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन और आईडी जारी करने में सबसे पिछड़ा है। जानकारों की माने तो राजस्थान में जैसलमेर जिला दिव्यांगों के पंजीयन में सबसे अंतिम पायदान में है। उनके अनुसार जिले में अब तक कुल 13 हजार 394 दिव्यांगों का ऑनलाइन पंजीकरण किया गया, लेकिन इनमें से महज 1998 दिव्यांगों को ही आईडी जारी की गई है।
यह है हालात
सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग के पोर्टल पर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रदेश के 9 लाख 60 हजार 646 दिव्यांगों ने पंजीकरण करवाया था। जिसमें से 2 लाख 61 हजार 869 को ही प्रमाण-पत्र जारी हो पाए है। इसके अलावा अभी कई दिव्यांग ऐसे भी है, जिनको यूडी आईडी भी जारी नहीं हुई है। ये प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही दिव्यांग योजनाओं का लाभ ले पाएंगे।

IMAGE CREDIT: patrika

इन जिलों की यह है स्थिति
राजस्थान में भरतपुर टॉप पर रहा है। यहां सबसे ज्यादा 68 हजार 875 दिव्यांगों का पंजीकरण हुआ। झुंझुनूं 22 हजार 839 के पंजीयन के साथ 21 वें स्थान पर है। सीकर 19 हजार 528 पंजीकरण के साथ 22वें, चूरू 28वें यहां 15323 का पंजीकरण हुआ। जैसलमेर में सबसे कम 13394 दिव्यांगों का पंजीकरण हुआ। यूडी आईडी जारी करने में नागौर अव्वल है। यहां 16 हजार 88 दिव्यांगों को यूडीआईडी कार्ड जारी किए गए। सबसे कम जैसलमेर में 1998 को आईडी ही जारी हो पाई है। झुंझुनूं में 9 हजार 238, सीकर में 5 हजार 683 और चूरू में 4 हजार 455 दिव्यांगों को यूडी आईडी कार्ड जारी किए गए हैं।
अटके इतने आवेदन
प्रदेश के विभिन्न ब्लॉक सीएमएचओ कार्यालयों में 3 लाख 95 हजार 845 आवेदन अटके हुए थे। इसके पीछे बड़ी वजह ब्लॉक स्तर पर दिव्यांगों की कैटेगरी के अनुसार विशेषज्ञ नहीं होना बताया जा रहा है। एक तर्क यह भी है कि ब्लॉक सीएमएचओ दिव्यांगों के आवेदनों को ऑनलाइन फॉरवर्ड नहीं कर रहे हैं। प्रदेश में विभिन्न जिला अस्पतालों में 52 हजार 987 आवेदन पीएमओ के पास अटके हैं। वही राज्य के सीएमएचओ कार्यालयों में 5 हजार 106 आवेदन रुके हुए हैं। मेडिकल कॉलेजों को रैफर 55 हजार 862 आवेदनों का निस्तारण नहीं होने से यह स्थिति बनी है। सरकार