4 नवंबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जानिए कब मिलेगा जालोर को आंखों का डॉक्टर

आंखों के सर्टिफाइड कोर्स के प्रशिक्षण को लेकर जालोर से भेजा था डॉक्टर, जिला मुख्यालय पर जरूरत के बावजूद अन्य जिले में लगा दी ड्यूटी
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

महोबा

•

image

Pradeep Singh Bidawat

•

Updated: 23 Mar 2017, 12:17 PM IST

जालोर. जिला मुख्यालय स्थित नेत्र चिकित्सालय बीते कई सालों से नेत्र विशेषज्ञ की कमी से जूझ रहा है। यहां विशेषज्ञ की स्थायी नियुक्ति नहीं होने के कारण मरीजों को कई बार मजबूरन निजी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। हालांकि यहां नेत्र विशेषज्ञ डॉ. हरीश ललवानी को वैकल्पिक तौर पर लगा रखा है, लेकिन वे भी महीने के पहले और तीसरे सप्ताह में यानी 14 दिन ही यहां सेवाएं देते हैं। बाकी के दिन यहां आने वाले मरीजों को अन्यत्र उपचार के लिए जाना पड़ता है। नेत्र विशेषज्ञ की समस्या के चलते जालोर से ही एक चिकित्सक डॉ. अनिल जुनैदिया को प्रशिक्षण दिलाने के लिए 9 मार्च 2015 को भेजा गया था। मेडिकल कॉलेज में 21 माह का सर्टिफाइड कोर्स पूरा करने के बाद उन्हें चित्तौड़ लगा दिया गया। जबकि जालोर को भी नेत्र विशेषज्ञ की बेहद जरूरत थी।
शिविरों में उमड़ती है भीड़
देखा जाए तो जिला मुख्यालय पर विभिन्न सामाजिक संस्थानों की ओर से समय-समय पर नेत्र जांच शिविरों का आयोजन किया जाता है। इन शिविरों में सैकड़ों की संख्या ेमें मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। यहां नेत्र विशेषज्ञ की कितनी जरूरत है। अगर जिला मुख्यालय पर स्थायी नेत्र विशेषज्ञ लगाया जाता है तो मरीजों को इससे काफी सहुलियत होगी।
कुल 8 ने लिया था प्रशिक्षण
जिले भर से 21 माह के सर्टिफिकेट कोर्स के प्रशिक्षण लिए कुल 8 डॉक्टर्स का चयन कर मेडिकल कॉलेजों में भेजा गया था। इनमें डॉ. जुनेदिया को नेत्र, डॉ. नेमीचंद संघवी, डॉ. मांगीलाल विश्नोई व डॉ. नैनमल परमार को रेडियोलॉजिस्ट, डॉ. खुशाल सुंदेशा व डॉ. वेदप्रकाश मीणा को ऑर्थोपेडिक, डॉ.रघुनंदन व डॉ. कमला भारती को स्त्री रोग से संबंधित प्रशिक्षण के लिए भेजा गया।
कमजोर पैरवी का नतीजा
जनप्रतिनिधियों की कमजोर पैरवी का ही नतीजा है कि लम्बे समय जालोर मुख्यालय पर ही नेत्र विशेषज्ञ की स्थायी नियुक्ति नहीं हो पाई है। जालोर से भेजे गए इस चिकित्सक को जालोर में लगाने के लिए जनप्रतिनिधि थोड़ा सा भी प्रयास करते तो यह समस्या समाप्त हो सकती थी। ग्रामीण क्षेत्र की तो छोडि़ए शहरी अस्पतालों में भी चिकित्सा सेवाएं बदहाल है। बावजूद इसके जिले के राजनीतिज्ञों की ओर से चिकित्सा सेवाएं पाने को लेकर मजबूत पैरवी नहीं की जा रही है। ऐसे में यहां के लोगों को बेहतर इलाज के लिए गुजरात या आस-पास के क्षेत्र के दूसरे निजी चिकित्सालयों में जाना पड़ता है।
मरीजों को होगी सहुलियत
शहर स्थित नेत्र चिकित्सालय में डॉ. हरीश ललवानी को अस्थायी तौर पर लगा रखा है।वे महीने में १४ दिन यहां आकर मरीजों की जांच और उपचार करते हैं। वहीं आवश्यकता पडऩे पर शिविरों में भी उन्हें बुलाया जाता है। अगर यहां स्थायी तौर पर विशेषज्ञ की नियुक्ति होती है तो इससे मरीजों को फायदा होगा।
- डॉ. रमेश चौहान, कार्यवाहक पीएमओ, जिला अस्पताल
मंत्रीजी से बात की है...
जिला मुख्यालय पर नेत्र विशेषज्ञ की स्थायी नियुक्ति के बारे में मुझे जानकारी है।इस बारे में मैंने मंत्रीजी से बात कर डॉ. जुनेदिया या एक अन्य विशेषज्ञ के बारे में बताया है। जल्द ही दोनों में से एक को यहां लगाया जाएगा।
- अमृता मेघवाल, विधायक, जालोर