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सिविल सर्जन ने गुपचुप तरीके से JDS में कर दी 6 कर्मचारियों की भर्ती, धीरे-धीरे खुल कारनामों का पिटारा…

CG Job Fraud: जांजगीर-चांपा जिले में तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल का जाते-जाते एक बड़े कारनामे का खुलासा हुआ है।

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सिविल सर्जन ने गुपचुप तरीके से JDS में कर दी 6 कर्मचारियों की भर्ती, धीरे-धीरे खुल कारनामों का पिटारा...

CG Job Fraud: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल का जाते-जाते एक बड़े कारनामे का खुलासा हुआ है। उन्होंने जीवन दीप समिति में कलेक्टर दर पर 6 लोगों की नियुक्ति कर दी है। इस बात का खुलासा उनके यहां से स्थानांतरण होने के बाद हुआ है। यहां पर बड़ा सवाल यह है कि भर्ती में उन्होंने नियमों के किसी भी मापदंड का पालन नहीं किया गया है।

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CG Job Fraud: भर्ती पर उठे सवाल

तत्कालीन सिविल सर्जन के कई कारनामों के चलते जिला अस्पताल का नाम भी हुआ है तो वहीं कई कारनामों की पोल भी धीरे-धीरे खुल रही है। इन दिनों एक बड़े खुलासे के चलते जिला अस्पताल फिर सुर्खियों में है। दरअसल, जिला अस्पताल के पूर्व सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल ने जीवनदीप समिति में छह कर्मचारियों की नियुक्ति कर दिया है।

इन कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान कलेक्टर दर पर होगा। यहां पर बड़ा पेंच यह अड़ गया है कि भर्ती में नियमों का पालन नहीं किया गया है। न तो किसी तरह का वेकैंसी निकाली गई है और न ही भर्ती हुए अभ्यर्थी किसी क्षेत्र में एक्सपर्ट हैं। जबकि भर्ती नियम में कुशल, अकुशल सहित अन्य क्षेत्र में पारंगत कर्मचारियों का भर्ती होना था। कुल मिलाकर बंदर बांटे रेवड़ी अपने ही अपनों को दे वाली कहावत चरितार्थ हो रहा है।

पांच महीने पहले हो चुका है अनुमोदन

पत्रिका के सवाल पर अस्पताल सलाहकार से बात की गई तो उनका कहना है कि भर्ती के लिए पांच महीना पहले फाइल चली थी। जिसमें कलेक्टर का अनुमोदन लिया गया था। लेकिन बीच में निकाय व पंचायत चुनाव सामने आ जाने के कारण भर्ती नहीं की जा सकी थी। बाद में जिला अस्पताल में विवाद गहरा गया था तो भर्ती रोक दी गई थी। सीएस के स्थानांतरण होने के एक दिन पहले लिस्ट जारी की गई और भर्ती भी कर ली गई।

लिस्ट देने से किया इनकार

पत्रिका ने जिन अभ्यर्थियों का चयन जीवन दीप समिति से हुआ है उनकी लिस्ट सार्वजनिक करने की जानकारी चाही गई तो जिम्मेदारी ने बताने से इनकार कर दिया। इससे साफ जाहिर होता है कि भर्ती में पारदर्शिता नहीं बरती गई है। मनमानी तरीके से अपने अपने लोगों को भर्ती कर लिया गया है।

क्या है नियम?

जानकारों की माने तो जीवन दीप समिति का पैसा मरीजों से ली जाने वाली फीस के होते हैं। इसके लिए बाकायदा समिति में 10 बड़े वर्ग के लोगों की टीम बनी होती है। जिसमें कलेक्टर समिति के अध्यक्ष होते हैं। इनके अनुमोदन के पश्चात ही समिति के पैसों का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन यहां पर बड़ा सवाल यह है कि क्या भर्ती में इन सदस्यों की राय ली गई है, या नहीं।

अस्पताल सलाहकार की भूमिका संदिग्ध

बताया जा रहा है कि जीवनदीप समिति में जिन लोगों की गुपचुप तरीके से भर्ती की गई है उसमें अस्पताल प्रबंधक अंकित ताम्रकार की भूमिका संदिग्ध है। अस्पताल में जितने भी बड़े कारनामे किए जाते हैं उनकी भूमिका अहम रहती है। इस भर्ती में भी उनकी भूमिका अहम रही है। सूत्रों का यह भी आरोप है कि भर्ती में उन्होंने अपने अपनों की भर्ती की है। इसमें लेन-देन की बात भी सामने आ रही है।

अस्पताल प्रबंधक अंकित ताम्रकार ने कहा की जीवन दीप समिति में ६ लोगों की भर्ती हुई है। इनका अनुमोदन जनवरी में कर लिया गया था, लेकिन बीच में चुनाव आ जाने की वजह से भर्ती नहीं कर पाए थे। पूर्व सीएस के निर्देशन में कुछ दिन पहले भर्ती की गई है। भर्ती में पूरे नियमों का पालन किया गया है।

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