
न ही रेलवे स्टेशन में और न ही बैंक में है रैंप
जांजगीर-चांपा. जिले के रेलवे स्टेशन व बैंकों में दिव्यांगो के लिए रैंप की व्यवस्था नहीं की गई है। जबकि यह नियम में है कि सभी बैंक व रेलवे स्टेशन रैंप अनिवार्य रूप से होना चाहिए। लेकिन इसका पालन न तो बैंक करवा रहा है न ही रेलवे के अधिकारी कर रहे है। जिससे दिव्यांगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जिला मुख्यालय जांजगीर में संचालित सभी बैंकों की शाखाओं में रिजर्व बैंक व शासन से जारी निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। शहर के किसी भी बैंक व जिला मुख्यालय में रैंप नहीं बनवाया गया है, इस वजह से नि:शक्तों को बैंकिंग सेवा व स्टेशन में यात्रा करने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना प ड़ रहा है। शहर में राष्ट्रीयकृत व निजी बैंकों की आधा दर्जन शाखाएं संचालित है। इन बैंको में नि:शक्तजनों के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं है। स्टेशन रोड में संचालित पंजाब नेशनल बैंक व भारतीय स्टेट बैंक, अकलतरा चौक में संचालित बैंक आफ बड़ौदा व नैला रोड में संचालित भारतीय स्टेट बैंक की दूसरी शाखा ऊपरी हिस्सों में संचालित हैं, जहां पहुंचने के लिए सीढ़ी का उपयोग करना पड़ता है। सीढ़ी में चढऩा-उतरना नि:शक्तजनों के लिए परेशानी भरा होता है। सीढ़ी चढऩे-उतरने में हो रही परेशानी को ध्यान में रखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सभी बैंकों के मुख्य द्वार पर रैंप बनवाने के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन आरबीआई के इस निर्देश का शहर के किसी बैंक में पालन नहीं हो रहा है। इसी तरह रेलवे स्टेशन जांजगीर-नैला में प्लेटफार्म तक पहुंचने के लिए रैंप तो है। लेकिन प्लेटफार्म नंबर १ से २,३ व ४ में जाने के लिए रैंप नहीं बनाया गया है। जबकि यह माडल स्टेशन का दर्जा प्राप्त स्टेशन है। बैंको में दृष्टिबाधित लोगों के लिए ब्रैल पैडयुक्त बोलने वाले एटीएम लगाने के निर्देश भी आरबीआई ने दिए है, इसके बावजूद शहर में संचालित सभी बैंकों की शाखाओं में रिजर्व बैंक आफ इंडिया की इस गाइड लाईन की अनदेखी की जा रही है। लिहाजा, दृष्टि बाधित व अस्थिबाधितों को बैंक व रेलवे स्टेशन में किसी को साथ लेकर आने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
सरकार की भी परवाह नहीं
नि:शक्तजनों के लिए केंद्र व राज्य सरकार कई योजनाएं संचालित कर रही हैं। इन योजनाओं की राशि हितग्राही को बैंकों के माध्यम से प्रदान की जाती है। जांजगीर शहर सहित आसपास के गांवों में निशक्तजनों की संख्या हजारों में हैं, जिन्हें जिला मुख्यालय जांजगीर पहुंच कर बैंकों से पेंशन व अन्य राशि आहरित करनी पड़ती है। इसके अलावा जांजगीर-नैला रेलवे स्टेशन से अन्य बड़े शहर में गंतव्य की ओर जाते है। ऐसे लोगों को सुविधा देने में कोताही बरत रहे हंै। जबकि दिव्यांगजन को समान अवसर देने व उनके हितों की रखा और पूर्ण सहभागिता के लिए १ जनवरी १९९६ को यह नियम बनाया गया है। नियम में सेक्शन ४४-४६ के तहत किसी भी सार्वजनिक बिल्डिंग में रंैप अनिवार्य है।
यह है आरबीआई के निर्देश
रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने अपै्रल 2009 में एक प्रपत्र जारी कर सभी बैंकों को मुख्य द्वार पर रैंप बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एक तिहाई एटीएम कक्ष में ब्रैल पेडयुक्त बोलने वाले एटीएम मशीन लगाए जाने हैं। आरबीआई के यह भी निर्देश हैं कि बैंकिंग सेवा देने के मामले में बैंकों की ओर से नि:शक्तजनों व दृष्टिबाधित लोगों से किसी भी प्रकार का भेदभाव न बरता जाए। इसी तरह मगर बैंकों में ऐसा नहीं हो रहा है। मुख्य द्वार पर रैंप नहीं बनने से विकलांग व दृष्टिबाधित लोगों को बैंको में प्रवेश करने में परेशानी हो रही है। वहीं, शहर के प्रमुख बैंकों के अधिकारी यह कह कर बच जा रहे हैं कि रैंप के लिए जगह नहीं मिली व ब्रेल पेडयुक्त बोलने वाले एटीएम मशीन लगाने की कोई योजना नहीं है।
यह व्यवस्था होनी चाहिए
- मुख्य द्वार पर सीढिय़ों के अलावा रैंप
- रेलवे स्टेशन में प्लेटफार्म १ से २ व ३,४ में जाने के लिए रैंप
- रैंप में सहारे के लिए रेलिंग का निर्माण
- दृष्टि बाधितों के लिए ब्रैल के पेडयुक्त बोलने वाले एटीएम
- एटीएम कक्षों में नि:शक्तजनों के बैठने के लिए कुर्सी
Updated on:
29 Apr 2019 07:28 pm
Published on:
29 Apr 2019 07:28 pm
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