झालावाड़.जिले में इन दिनों डेंगू बीमारी कहर बरपा रही है। एसआरजी अस्पताल में प्रतिदिन जांच में करीब 30 से 35 मामले डेंगू पॉजिटिव के आ रहे हैं। साथ ही वायरल एवं अन्य मौसमी बीमारियों का संक्रमण भी तेजी से बढ़ रहा है।यही कारण है कि गांवों से लेकर शहरों तक अस्पतालों में लंबी कतारें नजर आ रही है। ऐसे में डेंंगू पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढऩे से प्लेट लेट्स की मांग दिनों दिन बढ़ रही है। ऐसे में मरीजों को एसडीपी चढ़ाने के लिए घंटों मरीजों के परिजनों को घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज की लैब में प्रतिदिन 300-350सैंपल की जांच हो रही है, जिसमें से करीब 30-40 डेंगू पॅाजिटिव आ रहे हैं। इनमें से 7-8 मरीजों को प्रतिदिन एसडीपी चढ़ाने की जरुरत पड़ रही है। लेकिन एसआरजी चिकित्सालय की बल्ड बैंक में स्टाफ का टोटा मरीजों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। लेकिन चिकित्सालय प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं होने से मरीजों का मर्ज और बढ़ता जा रहा है। एक पखवाड़े में तीन बार एसडीपी के लिए किट खत्म होने से मरीजों की जान सांसत में आ गई है। वहीं कर्मचारियों की कमी से रक्तदान शिविर में तकनीकी कर्मचारी भेजने में भी काफी परेशानी आ रही है।
पत्रिका टीम ने मौके पर जाकर हालात का जायजा लिया तो स्थिति बयावह नजर आई। तकनीशियनों की कमी से ब्लड बंैक के बाहर एसडीपी,आरडीपी के लिए मरीजों के परिजन इंतजार करते नजर आए।
वार्ड ब्वाय करता मिला कंपोनेट तैयार, हो सकती है बड़ी गलती-
एसआरजी चिकित्सालय की ब्लड बैंक में तकनीशियनों का टोटा होने से ब्लड कंपोनें तैयार करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में वार्ड ब्वाय पंकज मालवीय कंपोनेंट तैयार करता मिला है। ऐसे में सूत्रों ने बताया कि कभी कोई बड़ी गलती हो सकती है। जबकि नियमानुसार ब्लड बैंक में तकनीकी जानकार ही ब्लड से जुड़ेे कार्य कर सकते हैं। लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर अनजान लोगों से काम नहीं करवाया जा सकता है।
इतना स्टाफ चाहिए-
यूनिट जरुरत तकनिशियन
ब्लड कंपोंनेट - 3
ब्लड क्रांस मेच- 5
ब्लिडिंग रुम में- 3
एसडीपी के लिए- 4
एलाइजा- 1
स्टोर किपर- 1
कांउसलर- 1
नोट: अभी तकनीशियन 9 ही काम कर रह है, जबकि जरुरत 15 से अधिक की है।
एक पखवाड़े में इतनी चढ़ी एसडीपी