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दो साल से गॉज-पट्टी व दवाइयों को तरस रहे आयुर्वेदिक चिकित्सालय

    मंडे मेगा स्टोरी. जिले में अ श्रेणी के चार चिकित्सालय
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झालावाड़

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Hari Singh Gujar

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Updated: 28 Dec 2020, 10:33 PM IST

For two years, Ayurvedic hospital has been suffering from gauze bandag

दो साल से गॉज-पट्टी व दवाइयों को तरस रहे आयुर्वेदिक चिकित्सालय,दो साल से गॉज-पट्टी व दवाइयों को तरस रहे आयुर्वेदिक चिकित्सालय,दो साल से गॉज-पट्टी व दवाइयों को तरस रहे आयुर्वेदिक चिकित्सालय

झालावाड़.चिकित्सा विभाग की लापरवाही के चलते प्रदेशभर के आयुर्वेदिक अस्पतालों में पिछले तीन साल से गॉज पट्टी की आपूर्ति नहीं हुईएजहां थोड़ी बहुत हुई भी तो तीन से चार मरीजों में इस्तेमाल के बाद खत्म हो गई। कई औषधालय व चिकित्सालय ऐसे भी है जहां पर गॉज पट्टी बिल्कुल ही नहीं आई है अकेले झालावाड़ जिले में 80 आयुर्वेदिक औषधालय हैए जहां पर गॉज व पट्टियां नहीं पहुंची। हालांकि चिकित्सक खुद के स्तर पर प्रबन्ध कर जुगाड़ से काम चला रहे हैं। इसके बाद भी हालात ज्यादा बिगड़ते नजर आ रहे हैं। प्रदेश के पालीए ब्यावरए किशनगढ़ए कोटाए झालावाड़ए सीकर सहित अन्य जिलों में गॉज पट्टी व दवाइयों के अभाव में आयुर्वेदिक औषधालयों को इलाज खत्म करने की स्थिति में ला दिया है। जिला स्तरीय अस्पतालों तक में इसका अभाव है। ऐसे में कोरोना काल में भी विभाग का इस ओर ध्यान नहीं होने से मरीजों को चिकित्सालय आकर मायूस होना पड़ रहा है।

पड़ताल में आई जानकारी सामने-
चिकित्सा सूत्रों की माने तो 11 नवंबर से 2018 से गॉज व पट्टियों की आपूर्ति प्रदेश के चिकित्सालयों में नहीं हुई है। वहीं अभी कोरोना काल में आवश्यक दवाईयों भी नहीं आ रही है। इसकी वजह से आयुर्वेदिक औषधालय में आने वाले रोगियों के साथ काफी मुश्किल रहती है। कई बाद बेहद जरूरत होने की स्थिति में चिकित्सक खुद व्यवस्था करते हैंए जिले के झालावाड़ए भवानीमंडीए मनोहरथानाए झालरापाटन आदि अ श्रेणी औषधालय में पता किया तो पता चला कि पिछले दो साल से पट्टी आदि नहीं आने से स्थिति बेहद खराब है। किसी भी केन्द्र में पट्टियां नहीं मिली। तो अब दवाईयों का टोटा।

रसायन शाला से नहीं आ रही-
सूत्रों ने बताया कि रसायन शाला भरतपुर से कोटासंभाग में कॉटन सहित अन्य दवाईयां आती हैए लेकिन अभी नहीं आने से परेशानी ज्यादा हो रही है। निदेशालय स्तर से टैंडर नहीं होने से भी परेशानी ज्यादा आ रही है। हालंाकि दस हजार रूपए का बजट पूरे जिले में दिया गया हैए लेकिन उसका भी अभी लेटर ही आया हैए बजट नहीं आने से चिकित्सालय अपने स्तर पर भी कुछ नहीं खरीद पा रहे हैं। रसायन शाला में पहले 50 तरह की दवाईयां बनती थीए जो अब 25 तरह की ही बन रही है।

पोस्ट कोविड सेंटररू सिर्फ परामर्श-
ऐसे में 21 दिसम्बर से अ श्रेणी के जिला मुख्यालय के आयुर्वेद चिकित्सालय में पोस्ट कोविड सेंटर बना दिया गया हैए इसके बाद भी मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। प्रतिदिन मरीज कोरोना से ठीक हुए आधा दर्जन मरीज इम्प्युनिटी सहित अन्य आवश्यक दवाई लेने आ रहे हैंए लेकिन उन्हें दवाई की जगह सिर्फ परामर्श ही मिल रहा है। ऐसे में मौसमी बीमारियां सर्दीए जुकामए बुखार आदि की दवाई भी नहीं मिल पा रही है। मरीजों को सिर्फ काढ़ा व तीन चार तरह की दवाई ही मिल रही है।
फैक्ट फाइल-
. जिले में 80 औषधालय
. अ श्रेणी के चिकित्सालय 4
. एक जिला चिकित्सालय
. जरा अवस्था केन्द्र व योग केन्द्र आदि की सुविधा


परेशानी तो होती है-
पट्टियां व आवश्यक दवाई नहीं आने से परेशानी तो होती है। रसायान शला से ही नहीं आई हैए ऐसे में मौसमी बीमारियों के मरीजों पर्याप्त दवाईयां नहीं मिल पा रही है।
महेश पारीक, जिलाध्यक्ष आयुर्वेद चिकित्सा संघ,झालावाड़।
साल में दो बार आती है-
दवाइयां आयुर्वेद विभाग की ओर से साल में दो बार आती हैए एक बार की आ गई हैए अब दूसरी बार की आने की तैयारी हैए हमसे रूट चार्ज मांग लिया हैए जल्द आने की उम्मीद है।
विजय सिंह मेवाड़ा, उपनिदेशक, आयुर्वेद विभाग,झालावाड़।