परेशानी तो होती है-
पट्टियां व आवश्यक दवाई नहीं आने से परेशानी तो होती है। रसायान शला से ही नहीं आई हैए ऐसे में मौसमी बीमारियों के मरीजों पर्याप्त दवाईयां नहीं मिल पा रही है।
महेश पारीक, जिलाध्यक्ष आयुर्वेद चिकित्सा संघ,झालावाड़।
साल में दो बार आती है-
दवाइयां आयुर्वेद विभाग की ओर से साल में दो बार आती हैए एक बार की आ गई हैए अब दूसरी बार की आने की तैयारी हैए हमसे रूट चार्ज मांग लिया हैए जल्द आने की उम्मीद है।
विजय सिंह मेवाड़ा, उपनिदेशक, आयुर्वेद विभाग,झालावाड़।