
Garlic did not enter garlic
रटलाई. लहसुन के अच्छे भाव मिलने की उम्मीद लगाए क्षेत्र के किसान लम्बे समय से बैठे थे, लेकिन गिरदावरी में लहसुन नहीं होने से उन्हें निराशा हुई है। अब वे आसपास की मंडियों या फिर खुले में लहसुन बेचने को मजबूर है। उनका कहना है कि पटवारी की गलती का खामियाजा उन्हें भुगताना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार क्षेत्र के किसानों ने कड़ी मेहनत से फसल पैदा की, लेकिन जब बेचने का समय आया तो लहसुन के भाव अर्श से फर्श पर आ गए। इसके चलते रटलाई क्षेत्र के गांव वाजिन्दपुरा के किसान बदेसिंह ने कुछ दिनों पूर्व आत्महत्या का प्रयास भी किया था। वहीं कोटा संभाग में कई किसानों ने कर्ज के चलते मौत को गले लगा लिया। इसके बाद राज्य सरकार ने आनन-फानन में बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत खरीदने के लिए केन्द्र खोले। तौल कांटों पर बेचने के लिए किसान पटवारियों से गिरदावरी व नकल लेने जाते हैं, लेकिन पटवारी द्वारा गिरदावरी सही नहीं करने के कारण उनके खातों में लहसुन की फसल नहीं आ रही है। किसानों ने पटवारी पर एक ही जगह बैठकर गिरदावरी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इसके चलते अब उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जनमित्र पर नहीं मिल रहे टोकन गिरदावरी में लहसून की फसल नहीं होने पर किसानों को जनमित्र पर टोकन नहीं मिल रहे हैं। इसके चलते सरकारी तौल कांटे पर लहसुन नहीं बेच पा रह हैं। उन्हें आसपास की मण्डियों में औने-पौने दामों पर लहसुन बेचने को मजबूर होना पड़ेगा।
प्रशिक्षु पटवारी से परेशानी
कस्बे के कई किसान ऐसे हैं जिनके खातों में लहसुन की जगह सरसों, गेहूं व धनिया दर्ज कर दिया गया है। जबकि उन्होंने लहसुन की पैदावार की थी। किसानों ने बताया कि गिरदावरी के समय पटवारियों की हड़ताल चल रही थी। कई हल्कों में प्रशिक्षु पटवारी लगाए गए थे, जिसके कारण इस प्रकार से परेशानी आ रही है।
आत्महत्या का प्रयास
गांव वाजिन्दपुरा में किसान बदेसिंह लोधा ने खुद के हिस्से वाले खेत एवं गोविन्दपुरा में करीब 14 बीघा में खेती की थी, जिसमें लहसून व किलोंजी बोई थी, लेकिन लहसून का भाव मण्डी में करीब 8 से 12 रुपए होने से लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। किसान ने मण्डी का भाव सुनकर 21 अप्रेल 2018 को खेत पर आत्म हत्या का प्रयास किया था।
खेत में लहसुन की फसल बोई थी, जबकि पटवारी के पास गिरदावरी लेने गए तो उसमें लहसुन की फसल दर्ज ही नहीं की गई। इसके कारण जनमित्र पर टोकन नहीं कट पा रहा है।
रामप्रसाद माली
गिरदावरी के समय प्रशिक्षु पटवारी लगाए गए थे। उन्हें कार्य का ज्ञान नहीं होने से खेत में लहसुन की जगह अन्य फसल लिख दी। अब हमें सरकारी तौल पर बेचने में समस्या आ रही है।
रोडूलाल लोधा
रटलाई के किसान रोडूलाल लोधा ने बताया कि गिरदावरी के समय नये पटवारी लगाएं गए लेकिन उनकों कार्य का ज्ञान नहीं होने से खेत में लहसून की जगह अन्य फसल लिख दी गई । जिसके कारण लहसून को सरकारी तौल पर बेचने में समस्या आ रही है।
रटलाई के किसान रामप्रसाद माली ने बताया कि खेत में लहसून की फसल बोई जब पटवारी के पास गिरदावरी लेने गए तो उसमें लहसून की फसल दर्ज ही नहीं कई गई । जिसके कारण जनमित्र पर टोकन नहीं कट पा रहा है।
करीब 4-5 बीघा में लहसुन की बुवाई की थी, लेकिन पटवारी ने धनिया दर्ज कर दिया। अब औने-पौने दामों पर लहसुन आसपास की मंडियों में बेचना पड़ेगा।
शिवलाल बागरी
मैंने दो मई को रटलाई हल्का का चॉर्ज लिया है। गिरदावरी के समय यहां पर प्रशिक्षु पटवारी लगाया गया था।
यशपाल मीणा,
रटलाई पटवारी।
गिरदावरी के समय नया पटवारी था, लेकिन उस समय कानूनगो भी साथ थे। इस प्रकार से किसी जगह पर त्रुटि हो गई होगी।
ओमप्रकाश शर्मा,
नायब तहसीलदार बकानी
Published on:
25 May 2018, 11:27 AM IST
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