हर बार की परेशानी-
जनाना चिकित्सालय में हर वर्ष यही परेशानी आती है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी समस्या का समाधान निकलने की बजाए एसी रूम से बाहर नहीं आते हैं। ऐसे में मरीजों में संक्रमण का खतरा अधिक बढ़ जाता है। जनाना चिकित्सालय में जब ये हालात बने उस समय करीब 35 महिलाएं भर्ती थी,जिनमें से करीब तीन महिलाओं के सीजेरियन ऑपरेशन होना था, लेकिन उन्हे भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।
दो घंटे बैठे रहे
जब पानी लेबर रूम से नहीं निकला तब तक किसी भी कर्मचारी ने काम नहीं किया। डॉक्टरों ने भी राउंड नहीं किया ऐसे में जिन गर्भवती महिलाओं की डिलेवरी होने वाली थी, उन्हे भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं नाइट स्टाफ ने सिर पर व पैरों में थैलियां पहनकर बड़ी मुश्किल से काम किया।