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भवानीमंडी में संतरों का कारोबार 200 करोड़ पार

—उत्पादन के चलते राजस्थान के नागपुर के नाम से प्रसिद्ध —श्रमिकों को मिल रहा रोजगार राजस्थान के नागपुर के नाम से प्रसिद्ध भवानीमंडी में संतरा न सिर्फ लोगों के जुबां पर चढ़ा हुआ है बल्कि 200 करोड़ के इस कारोबार से हजारों लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। यहां के संतरों का स्वाद पूरे देश में पहचान बनाये हुए है। इसके चलते भवानीमंडी में रोजगार के साधन भी बढ़ रहे हैं।
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झालावाड़

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VIKAS MATHUR

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Updated: 3 Apr 2023, 5:02 PM IST

भवानीमंडी में संतरों का कारोबार 200 करोड़ पार

भवानीमंडी में संतरों का कारोबार 200 करोड़ पार

ऐसे मिल रहा रोजगार
भवानीमंडी की संतरा मंडी देश में दूसरे स्थान पर है। यह राजस्थान में एकमात्र संतरा मंडी है। मंडी में एक हजार से अधिक श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है। साथ ही ट्रांसपोर्ट, कैंटीन, ढाबे का व्यवसाय भी यहां खूब फल-फूल रहा है। संतरों की पैकिंग के लिए पहले कैरेट्स बाहर से मंगवाने पड़ते थे। अब मांग को देखते हुए यहां कैरेट्स की दो फैक्ट्रियां शुरू हो गई हैं। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध हुआ है। पैंकिंग के समय चावल की घास का उपयोग होता है। इससे चावल उत्पादकों को भी फायदा मिल रहा है।

एक्सप्रेस-वे से जल्द पहुंचेगा माल
वर्तमान में संतरों को बाहर भेजने के लिए काफी लम्बा मार्ग तय करना पड़ता है। हाल ही में एक्सप्रेस वे का भवानीमंडी के पास रतनपुरा नीमथूर से लेदी चौराहा होते हुए २१ किलोमीटर का मार्ग भवानीमंडी से जोड़कर बनाया जाएगा। इससे व्यापारियों को आसानी होगी। कुछ दूरी पर ही एक्सप्रेस- वे से संतरे जल्दी ही बाहर एक्सपोर्ट हो सकेंगे।

तीन तरह के संतरों की छंटनी
यहां दो तरह के संतरे की क्वालिटी है। सर्दी में आने वाला अम्बिया और गर्मी में यह मृग कहलाता है। पूरे साल में करीब पांच हजार टन संतरा मण्डी में पहुंचता है। मंडी सूत्रों के अनुसार मण्डी में उत्पादन का दस प्रतिशत माल ही आता है। शेष सीधे ही व्यापारी बगीचों से ले जाते हैंं। मंडी में आने वाले संतरों की छंटनी तीन तरह की वैरायटी के आधार पर की जाती है। इसमें बड़ा, मध्यम और छोटा संतरा अलग निकाला जाता है। बड़े संतरे को बाहर भेजा जाता है। मध्यम संतरा शहरों में और छोटे संतरे को आसपास के गांवों और कस्बों में बेचा जाता है।

इनका कहना है...
भवानीमंडी के संतरों की मांग पूरे देश में है। स्वाद की तुलना में यहां का संतरा अधिक अच्छा है। इसीलिए बाहर भी भवानीमंडी के संतरे को प्राथमिकता दी जाती है। मंडी में करीब २०० करोड़ के संतरे का कारोबार होता है, लेकिन काली मिस्सी रोग के कारण उत्पादन पर प्रभाव पड़ रहा है। कृषि अधिकारियों को भी किसानों को समय-समय पर सलाह देते रहना चाहिए।

ताब चौधरी, संतरा व्यापारी, भवानीमंडी

इनका कहना है...
नवम्बर माह में संतरा आना शुरू हो जाता है, जो मार्च तक रहता है। मंडी में नीलामी के बाद व्यापारी साधनों से इसे ले जाते हैं और अपने स्तर पर इसकी छंटनी कर बाहर भेजते हैं। यहां के संतरे की विशेषता अन्य जगहों से अलग है।
मोहम्मद हमीद, संतरा व्यापारी, भवानीमंडी

अभिषेक ओझा — झालावाड