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मुन्नाभाईयों की नकल रोकने में पीजी कॉलेज प्रशासन विफल

- परीक्षा कक्ष में आए दिन वीक्षक के सामने ही कर रहे नकल, टोकने पर दे रहे धमकी
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झालावाड़

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Hari Singh gujar

•

Updated: 3 Apr 2018, 4:26 PM IST

PG College administration fails to counter duplicate Munnabhaiya

मुन्नाभाईयों की नकल रोकने में पीजी कॉलेज प्रशासन विफल


झालावाड़.राजकीय महाविद्यालय इन दिनों शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा के पीछे कारण है राजकीय महाविद्यालय में कोटा विश्वविद्यालय की परीक्षाएं चल रही है। परीक्षा में मुन्नाभाईयों के नकल पर लगाम लगाने में कॉलेज प्रशासन पूरी तरह से विफल साबित हो रहा है। यहां तक की वीक्षक द्वारा प्राचार्य को शिकायत करने के बाद भी कॉलेज प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। ऐसे में कुछ छात्रनेताओं द्वारा सरेआम नकल की करवाने के लिए धमकी दे रहे हैं। ऐसे में कोटा विश्वविद्यालय के पारदर्शितापूर्ण परीक्षाएं संचालित कराने का दावा बेमानी साबित हो रहा है। तो अन्य छात्र जो सालभर परीक्षा की तैयारी कर ईमानदारी से परीक्षा दे रहे हैं, वह परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं।


छात्र बोले,ऐसी परीक्षा का क्या फायदा-
पत्रिका ने लंबे समय तक परीक्षा की गतिविधियों पर नजर रखी। तो आए दिन छात्र नेताओं की टोलियों द्वारा वीक्षकों को धमका कर नकल करने के मामले सामने आए। सोमवार को इस संबंध में अन्य छात्रों से बात की तो उन्होंने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि वह तो पूरे साल दिन-रात एक कर परीक्षा की तैयारी करते हैं। जब उनके ही कमरे ऐसे छात्रनेता नकल करते हैं,तो परीक्षा पर संदेह होता है। फिर परिणाम आता है तो परीक्षक द्वारा सभी को एक जैसे ही नंबर दिए जाते है तो दु:ख होता है।

देखे किस परीक्षा कक्ष में क्या हुआ-
केस एक-
मार्च के शुरूआत में परीक्षा कक्ष नंबर १९,यहां चैकिंग के दौरान एक छात्रनेता की जेब से नकल के लिए लाया गया कागज निकाला गया। इस पर सारे छात्रनेता आ धमके फ्लाइंग ने बिना कार्रवाई के छोड़ दिया।
केस दो-
१५ मार्च परीक्षा कक्ष नंबर १७, यहां सुपरवाईजर को ही एक छात्र नेता ने बाहर जाने के लिए कह दिया। यहां तक कहा कि आप सुपरवाईजर है यहां क्यों बैठे है अन्य कमरों में जाकर चेक करो। क्या एक परीक्षक सुपरवाईजर को ऐसे बोल सकता है। लेकिन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आकर छात्र नेता बोल रहे हैं। कॉलेज प्रशासन मूकदर्शक बनकर बैठा है।

केस तीन-
२२ मार्च को परीक्षा कक्ष नंबर १८, ११ से २ बजे का पेपर था। एक छात्रनेता परीक्षा के दौरान ऊपर सारे कमरों में घूम रहा था। इसी दौरान वहां मौजूद वीक्षक ने टोका भी लेकिन छात्रनेता व्याख्याता से गाली-गलोच करने लग गया। लेकिन इस मामले में प्राचार्य को वीक्षक ने शिकायत भी की। लेकिन प्राचार्य ने कोई कार्रवाई करने के बजाए,वीक्षक को लिखित में शिकायत देने की बात कह कर मामले में कोईवाई नहीं की।

दो पुलिस कर्मियों की गेट पर ड्यूटी किसी को नहीं टोकते-
वैसे तो राजकीय महाविद्यालय के गेट पर परीक्षा के दौरान दो पुलिस कर्मियों की ड्यूटी रहती है। लेकिन वह भी किसी भी नेता या बाहरी लोगों को टोकते तक नहीं। इससे महाविद्यालय में कोई भी आ जा सकता है।

निजी वीक्षकों में भय-
महाविद्यालय में ६० फीसदी व्याख्याताओं के पद रिक्त है। ऐसे में नियमित व स्वयंपाठी १९ हजार छात्रों की परीक्षा महाविद्यालय के व्याख्याताओं द्वारा करवाना संभव नहीं है। ऐसे में हर वर्ष महाविद्यालय में बाहरी वीक्षकों की मदद ली जाती है। लेकिन आए दिन वीक्षकों को धमकी देने से बाहरी वीक्षकों में भय है। ऐसे में वह महाविद्यालय प्रशासन के कार्रवाई नहीं करने के रैवये से भी परेशान है। लेकिन वह करें तो क्या करें। उनका एक ही दु:ख है कि कहीं पीजी महाविद्यालय में यूपी, बिहार जैसे हालात नहीं हो जाए।

यह कहना है अधिकारियों का-
गत दिनों एक वीक्षक के साथ कहा-सुनी हुई थी। ज्यादा बड़ा मामला नहीं थी। इसलिए रिपोर्ट नहीं कराई। बाकी कार्रवाई कर रहे हैं।
बीएल बैरवा, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय, झालावाड़।
जो घटना मेरे साथ हुई थी। उसके बाद लिखित में माफी मांग ली गई है। कॉलेज ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अब छह सदस्यों की समिति बनाई है।
डॉ. अखेराज मीणा,वीक्षक पीजी कॉलेज,झालावाड़।

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