
ऐसा क्या हुआ की 2 वर्ष 8 माह में ही जवाब दे गई चीन की आधुनिक तकनीक से बनी कालीसिंध थर्मल की दूसरी यूनिट
झालावाड़/ हरिसिंह गुर्जर. जिले का कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट चायना की आधुनिक तकनीक पर बना पावर प्लांट राजस्थान का प्रथम पावर प्लांट है। लेकिन थर्मल की दूसरी यूनिट इतने कम समय में ही जवाब दे गई है। इससे कर्मचारी सहित उच्चाधिकारी यूनिट के सही होने को लेकर एजेन्सियों से संपर्क कर रहे हैं। तो कुछ एजेन्सियों से कोटेशन भी लिए जा रहे हैं। लेकिन दूसरी यूनिट के उत्पादन शुरू होने के २ वर्ष आठ माह बाद ही खराब होना। करोड़ों रूपए की लागत से अतिआधुनिक तकनीक से बने होने से थर्मल पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
ऐसे हुई शुरूआत-
कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट का शिलान्यास ३.९.२००८ को सीएम वसुन्धरा राजे ने किया। इसका टैंडर हुआ ९.७.२००८ को मैसर्स बीजीआर एनर्जी सिस्टम चैन्नई के हुआ।
जाने कितनी भूमि व बजट लगा-
-प्रथम यूनिट से वाणिज्यिक उत्पादन 7.5.2014 को शुरू
-दूसरी यूनिट से 25.7.2015 को शुरू हुआ।
-जमीन 842 बीघा सरकारी, 1388 बीघा निजी भूमि।
- 1400 बीघा जमीन में कन्ट्रक्शन।
- 600-600मेगावाट की दो यूनिट।
- 12 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है थर्मल, पांच गांवों की सीमा में।
- एशिया का सबसे बड़ा कूलिंग टावर, ऊंचाई 202मीटर।
-कुल प्रोजेक्ट कोस्ट 9479.51 करोड़
चायनीज तकनीक पर आधारित-
600 मेगावाट का पहला थर्मल पावर प्लांट है जो आधुनिकतम चायनीज तकनीक पर बना हुआ है। इसमें बीजीआर द्वारा डोंग-फोंग कपंनी का जनरेटर, टरबनाईन, बायलर सहित कई उपकरण लगाए गए है।
इसलिए प्रश्न चिन्ह-
दूसरी यूनिट को शुरू हुए 2 वर्ष 8माह 12 दिन ही हुए थे। कि 7 अप्रेल को बड़ी तकनीकी खामी आ गई। खराबी भी ऐसी की अभी तक पता नहीं चला कि आखिर क्या हुआ है। कितने दिन लग सकते हैं। जानकारों ने बताया कि अभी तीन महीने सही होने में लग सकते है। ऐसे में अगर टरबाईन सहित अन्य उपकरणों को अगर चायना के इंजीनियरों के पास ले जाना पड़ा तो करीब २० दिन तो ले जाने में लगेगा, इतना ही समय लाने में लगेगा। हालांकि जानकारों का मनाना है कि जनरेटर की वाइंडिंग जल गई है। इसके लिए भेल, डोंग-फोंग आदि कंपनियों के एक्सपर्ट को भी बुलाया गया है।
क्या हो रहा नुकसान-
जानकारों का कहना है कि यदि विदेशी कंपनी की बजाए देश में मौजूद भेल जैसी नामी कंपनियों से बनवाया गया होता तो, किसी भी तकनीकी खामी आने पर इनता खर्चा नहीं होता। तथा समय की भी बचत होती। वहीं यूनिट को सही करने में लगने वाला अतिरिक्त खर्चा व समय की बचत होती।
दूसरी यूनिट का अभी तक का उत्पादन-
2015-16-१६ 23505 लाख यूनिट
2016-17 22743 लाख यूनिट
2017-18 32888 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन
इनती आय हुई-
दूसरी यूनिट से करीब348198.4 लाख की आय हुई है
यह बोले अधिकारी-
सक्षम एजेन्सियों से बात कर रहे हैं। दूसरी यूनिट में क्या नुकसान हुआ है। यह देख रहे हैं। क्या-क्या लेगेगा यह देखने के बाद ही पता चलेगा, मैटेरियल आदि के लिए कंपनियों के साथ टैंडर निकाले जाएंगे।
डीपी वर्मा, चीफ इंजीनियर, कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट, झालावाड़।
Published on:
3 May 2018, 3:07 PM IST
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