बुंदेलखंड में आजादी के कई दशकों तक कांग्रेस का एक छत्र राज रहा है। यहां पर 80 के दशक के बाद राजनीतिक बदलाव की शुरुआत हुई। भाजपा, बसपा व सपा ने अलग- अलग समीकरणों के साथ खुद को प्रदेश में मजबूत किया। उस समय मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) ने सपा का गठन कर यादव व मुस्लिम गठजोड़ को अमली जामा पहनाना शुरू किया, जिसका उनको भरपूर लाभ मिला। प्रदेश में 2012 में सपा की सरकार बनी थी। इस चुनाव में पार्टी ने बुंदेलखंड से सर्वाधिक छह सीटें जीती थीं, लेकिन 2017 के अगले चुनाव में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। कभी ऐसा मौका नहीं रहा जब सपा ने बुंदेलखंड में दूसरे दलों का पत्ता साफ कर दिया हो।