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झुंझुनूं नगर निकाय चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद अब शहरी सरकारों के मुखियाओं की कुर्सी के लिए सियासी घमासान शुरू हो गया है। झुंझुनूं नगर परिषद सभापति पद के लिए कांग्रेस से अब्दुल्ला अगवान ने पर्चा भरा है। बहुमत से दूर होने के बावजूद भाजपा की ओर से भी मनु धनखड़ ने नामांकन दाखिल किया है। झुंझुनूं नगर परिषद के 60 वार्डों में से कांग्रेस ने 30 वार्डों में जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा के खाते में 15 और 15 निर्दलीय चुनाव जीते हैं। बहुमत के लिए 31 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। कांग्रेस के पास 30 पार्षद हैं, जबकि निर्दलीय पार्षद वीरेंद्र डारा के समर्थन से यह संख्या 31 होने का दावा किया गया है।
नगर परिषद झुंझुनूं में सभापति और जिले की 18 नगरपालिकाओं में अध्यक्ष का चुनाव 21 सितंबर को होना है। जिन निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है। पार्षदों को अपने खेमे में बनाए रखने के लिए बाड़ाबंदी कर उन्हें गुप्त स्थानों पर रखा गया है। ऐसे में अगले कुछ दिन शहरी सरकारों के मुखियाओं के चुनाव के लिहाज से बेहद अहम रहने वाले हैं।
झुंझुनूं जिले की 19 निकायों के कुल 555 वार्डों के चुनाव परिणामों में निर्दलीय प्रत्याशी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं। कांग्रेस ने 194, भाजपा ने 157 और निर्दलीयों ने 203 सीटों पर जीत दर्ज की है। यानी दोनों प्रमुख दलों से अलग निर्दलीयों की संख्या सबसे अधिक है। यही वजह है कि कई निकायों में अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक बन गया है।
भाजपा को जाखल और बिसाऊ में स्पष्ट बहुमत मिला है, जबकि कांग्रेस ने नवलगढ़ और मंडावा में बहुमत हासिल किया है। इन निकायों में अध्यक्ष पद का गणित अपेक्षाकृत साफ है। दूसरी ओर पिलानी, विद्याविहार, बगड़ और खेतड़ी में निर्दलीयों का दबदबा रहा है। यहां अध्यक्ष पद के चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रहने वाली है।
झुंझुनूं नगर परिषद के चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है। सभापति बनाने के लिए कांग्रेस को बहुमत के लिए एक वोट के समर्थन की जरूरत है। ऐसे में यहां भी अंतिम समय में समर्थन जुटाने को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं।
जहां स्पष्ट बहुमत नहीं है, वहां राजनीतिक दलों ने अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कवायद शुरू कर दी है। पार्षदों की बाड़ाबंदी के बीच निर्दलीय पार्षदों की पूछ बढ़ गई है। अब 21 सितंबर तक समर्थन जुटाने, खेमेबंदी मजबूत करने और अध्यक्ष-सभापति की कुर्सी का गणित साधने के लिए सियासी जोड़-तोड़ जारी रहने की संभावना है।
Updated on:
16 Sep 2026, 3:14 PM IST
Published on:
16 Sep 2026, 3:14 PM IST
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