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राजस्थान में यहां सरिस्का की तर्ज पर बनेगा अभयारण्य, आकर्षण का केन्द्र होगा समदौड़ तालाब

जिले के खेतड़ी का वन क्षेत्र अब जल्द ही देसी एवं विदेशी पर्यटकों के लुभाने लगेगा। सरिस्का की तर्ज पर यहां अभयारण्य बनाने के प्रयास शुरू हो गए हैं।
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झुंझुनू

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Vinod Singh Chouhan

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Updated: 6 Jun 2018, 11:22 AM IST

story of formation of Sanctuary like a Sariska Sanctuary in khetri

राजस्थान में यहां सरिस्का की तर्ज पर बनेगा अभयारण्य, आकर्षण का केन्द्र होगा समदौड़ तालाब

अविनाश चतुर्वेदी, झुंझुनूं.

जिले के खेतड़ी का वन क्षेत्र अब जल्द ही देसी एवं विदेशी पर्यटकों के लुभाने लगेगा। सरिस्का की तर्ज पर यहां अभयारण्य बनाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। इसको लेकर काफी कुछ काम भी हो गया है। इसके लिए करीब सात हजार हैक्टेयर में कनर्वेशन रिर्जव को राज्य सरकार ने गत वर्ष अपनी स्वीकृति दे दी है। 230 लाख का बजट भी स्वीकृत किया जा चुका है। यहां पर सांभर एवं चीतल भी छोड़े जाएंगे। झुंझुनूं में करीब 405 वर्ग किलोमटर वन क्षेत्र है। इसमें से करीब पचास फीसदी वन क्षेत्र करीब 200 वर्ग किलोमीटर केवल खेतड़ी क्षेत्र में है। ऐसे में वहां पर घने जंगल को देखते हुए वन्य जीव अभयारण्य की काफी संभावनाएं है। इसी को लेकर वन विभाग ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। यहां पर वल्र्ड एनिमल्स ट्यूरिस्ट पार्क की संभावनाओं को देखते हुए इसके लिए काम शुरू किया गया है।


अभी इन वन्य जीवों की है उपस्थित
खेतड़ी के जंगलों में गत दिनों पैंथर का एक जोड़ा लाकर छोड़ा गया है। ताकि यहां पर इनका कुनबा पनप सके। इसके अलावा सांभर, तितर, बटेर, पाटागोई, चिंकारा, नील गाय, डेजर फोक्स, नेवला आदि की उपस्थिति है।


सांभर चीतल छोडेंग़े
वन्य क्षेत्र में सांभर चीतल को भी लाकर छोडऩे की तैयारी की जा रही है। इसके लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। पूर्व में इस वन क्षेत्र में टाइगर की आवाजाही रही है। ऐसे में सांभर एवं चीतल की प्रजाति भी यहां पर रही होगी।

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जानवरों के लिए बनाया गया तालाब
वन्य जीवों को पीने का पानी मिल सके इसके लिए एक तालाब भी बनाया गया है। चारों ओर पक्की दीवार को निर्माण कर दिया गया है। वहीं इसमें पानी भरने के लिए सोलर से चलने वाली तीन ट्यूबवेल भी लगाई गई है।


आकर्षण का केन्द्र होगा समदौड़ तालाब
खेतड़ी के जंगल में समदौड़ा तालाब है। जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र होगा। यहां पर तालाब को पूरी तरह से विकसित कर दिया गया है। पर्यटकों की सुविधा के लिए बैठने के लिए बैंच आदि की व्यवस्था भी इस तालाब के आसपास की जा रही है।

यह हुआ अब तक
खेतड़ी में पर्यटकों को लुभाने के लिए जंगल को पूरी तरह से हरियाली से आच्छादित किया जा रहा है। यहां पर अब तक पांच व्यू पोइंट एवं हिलोक्स का निर्माण किया गया है। इसके अलावा इस सभी व्यू पाइन्टस को इंटरलिंक कर दिया है। जिससे रास्ते में कोई टकराव की स्थिति नहीं हो। वहीं वन विभाग की मॉनिटरिंग के लिए निरीक्षण पथ भी बनाए गए हैं। बीस किलोमीटर का एक ट्रेक भी निर्मित किया गया है। जिस पर बेरियर लगाए गए है।


पैंथर एवं शेर की आवाजाही की प्रबल संभावना
यह वन क्षेत्र दिल्ली से सटा हुआ है ऐसे में अलवर सरिस्का आदि क्षेत्रों से पैंथर एवं शेर की आवाजाही की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। यहां पर पूर्व में भी शौर एवं चीते के आने की जानकारी मिली है।


फैक्ट फाइल
कुल वन क्षेत्र- 200 वर्ग किमी
रिर्जव- 7018 हैक्टेयर
राज्य सरकार से मंजूरी- 10 मार्च 2017
बजट- 230 लाख
दीवार निर्माण- 4 किलोमीटर
वनरक्षक चौकी- 2
नलकूप- 3
रेस्ट पाईन्ट - 5
वाटर हाल्स- 10
एनिकट- 18


इनका कहना है...
हमने खेतड़ी वन क्षेत्र को अभयारण्य के रुप में विकसित करने का काम शुरू कर दिया है। हाल ही में दो पैंथर भी लाकर छोड़े है। ट्रेक आदि का निर्माण किया जा चुका है। काफी निर्माण चल रहा है। यह पय्रटकों के लिए एक अच्छा केन्द्र साबित होगा। -आर. एन.मीना, उपवनसंरक्षक वन विभाग झुंझुनूं