यहां कई सालों पहले लोग प्यार बुझाते थे आज जाए तो लौट आना मुश्किल
मलसीसर.
जहां एक ओर राज्य सरकार जल स्वावलम्बन अभियान के दौरान जल स्त्रोतों का संरक्षण कर रही है वहीं कस्बे के उपखण्ड कार्यालय के सामने वर्षो पुराना जोहड़ व गऊघाट अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। सालों पहले बने जोहड़ जहां किसी जमाने में राहगीर अपनी प्यास बुझाते थे उसी जोहड़ में आस करीब 6 मीटर तक मिट्टी जमा है तथा जोहड़ के दूसरी ओर बने गऊघाट में दलदल की स्थिति बन गई है जिसमें प्यास बुझाने आये मवेशी आये दिन फंस जाते है। करीब दो माह पूर्व कुंभाराम नहर परियोजना के दौरान बने डेम के टूटने के कारण पानी के तेज प्रवाह के हादसे ने बिगाड़ा जोहड़ एवं गऊघाट में काफी मात्रा में मिट्टी बहकर जोहड़ में जमा हो गई। फिलहाल इतनी भारी मात्रा में मिट्टी जमा है कि हालात देखकर कोई कहा नहीं सकता कि यहां पर ऐतिहासिक जोहड़ भी है। डेम के पानी के साथ बह कर आई मिट्टी ने इसे मैदान बना दिया। कभी इंसानों और बाद में मवेशियों की प्यास बुझााने वाला जोहड़ अब काफी जर्जर स्थिति में नजर आ रहा है। करीब दो वर्ष पूर्व श्री श्याम सेवा समिति के सदस्यों ने दो माह के प्रयास से पूरे जोहड़ की सफाई भी की थी लेकिन अब हालात काफी बदतर है।
सफाई आवश्यक कस्बे के लोगों के अनुसार मानसून नजदीक है, समय रहते जोहड़ की मिट्टी निकाल कर पूरी तरह से सफाई नहीं की गई तो बरसात का पानी इसके उपर से बह जायेगा। ऐसी स्थिती में जोहड़ की दिवार एवं चोरों तरफ बनी ऐतिहासिक छतरियों के गिरने का डर भी है।
2 करोड़ की क्षमता
उपखण्ड कार्यालय के सामने स्थित जोहड़ की लम्बाई व चौडाई 45 मीटर है। इसकी गहराई करीब 10 मीटर है। इसमें 6 मीटर तक मिट्टी भरी हुई है। जानकारी के अनुसार इसमें करीब 20 हजार किलोलीटर पानी यानी 2 करोड लीटर पानी का स्टोरेज हो सकता है। लोगों के अनुसार प्रशासन को मामले को गंभीरता से लेते हुए जोहड़ की तत्काल सफाई करवाई जानी आवश्यक है।