5 नवंबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

बड़ा खुलासाः जवान युद्ध से डरकर नहीं, बल्कि इस वजह से मौत को लगा रहे गले, आप भी जानें

सशस्त्र बलों में तनाव व अवसाद की वजह से जवानों के सुसाइड करने के मामले चिंताजनक हैं।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जोधपुर

•

image

Rakesh Mishra

•

Updated: 10 Sep 2023, 10:07 AM IST

army_jawan_suicide.jpg

जोधपुर। सशस्त्र बलों में तनाव व अवसाद की वजह से जवानों के सुसाइड करने के मामले चिंताजनक हैं। ऐसे में जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में सैन्य अधिकारियों व जवानों के लिए आयोजित मानसिक एवं भावात्मक पोषण शिविर में तनावमुक्त रहने की जानकारी साइकोलॉजिस्ट डॉ. मधुश्री चौधरी ने दी। मधुरम केयर की फाउंडर मधुश्री ने अपनी टीम के तरुणिमा कंवर, यश जोशी व लक्ष्य व्यास के साथ चार दिवसीय शिविर में जवानों की समस्याओं को जानने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि जवानों के तनाव का सबसे बड़ा कारण एकांकी परिवार है। वहीं अपने मन की बात को किसी के साथ शेयर नहीं करना भी बड़ा कारण माना जाता हैं।

यह भी पढ़ें- IMD Rain Alert: फिर सक्रिय हुआ मानसून, बस इतने देर में 18 जिलों में होने वाली है बारिश, नया अलर्ट जारी

नव भर्ती जवानों पर ज्यादा प्रभाव
मधुश्री ने बताया कि सेना में संवेदना के लिए कोई जगह नहीं होती, वहां हर आदेश की पालना चाहे वो सही हो या गलत, उसे पूरा करना सिखाया जाता है। वहीं सेना में आदेशों की पालना और उसे गतिमान रखने के लिए अधिकारी और जवान के बीच की दूरी भी आवश्यक है। लेकिन ये जवान की समस्या को संवेदना के साथ सुनने और सुलझाने में बाधा बनती है। अपनी समस्या ना अपने अधिकारी को बता पाना, शर्म के मारे साथियों से साझा न कर पाना। परिवार जो पहले से अधिकतर एकांकी हो चुके हैं और सारी समस्याओं के लिए जवान पर निर्भर है। ऐसी स्थिति में मानसिक परेशानी से घिरा जवान समस्या का सामना करने की बजाय अपनी क्षति कर लेता हैं। शुरुआती चरण में व्यक्ति को यह समझना जरूरी है कि उसे परेशानी है और मदद की आवश्यकता है।

यह भी पढ़ें- Assembly Elections 2023: गहलोत का बड़ा ऐलान, राजस्थान में नहीं चलेगा भाजपा का हिंदू कार्ड

तनावमुक्त रखने के लिए जरूरी
मधुश्री ने बताया कि जवानों एवं उनके परिवार की समस्याओं को समझने एवं निराकरण के लिए सामाजिक सपोर्ट सिस्टम का निर्माण करना जरूरी है। वहीं आम्र्ड फोर्सज एवं पैरामिलिट्री फोर्सेस में ट्रेङ्क्षनग के दौरान साइकोलॉजिकल काउंसलर का समावेश होना चाहिए। जवानों की अन्य विभिन्न तरीकों जैसे कि रिक्रिएशन एक्टिविटीज, टैलेंट सर्च एवं नवाचार में सहभागिता हो। वहीं सबसे महत्वपूर्ण स्वयं की जागरूकता जरूरी है। इसी तरह परिवार के लोगों को भी हर बात जवान को बताने से बचना चाहिए। इससे जवान के तनावमुक्त रहने में मदद मिल सकें।