इस बीमारी के 2 हजार प्रभावित जीन होते हैं। इनमें से भारत में अब तक 29 कॉमन जीन की पहचान हुई है। अन्य प्रभावित जीन की पहचान करने के लिए एम्सजोधपुर , पीजीआई चंडीगढ, एम्स दिल्ली, संजय गांधी पीजीआई लखनऊ सिविल हॉस्पीटल के शिशु रोग विशेषज्ञों की टीम इस बीमारी पर आनुवंशिक अध्ययन करेगी। अध्ययन में इस बीमारी से पीडि़त बच्चे के अगले भाई या बहन में इसी बीमारी की पहचान के लिए उसके जन्म से पहले मां के पेट में गर्भस्थ शिशु का रक्त व पानी का नमूना लेकर जांच की जाएगी। इसमें एम्स दिल्ली में सिस्टी फाइब्रोसिस से प्रभावित जीन की पहचान करेंगे। इससे मरीज के परिवार के दूसरे सदस्यों में भी प्रभावित जीन की पहचान करने की सुविधा मिलेगी। इस प्रोजेक्ट हो हरी झंडी मिलने के बाद कोख में प्रभावित जीन की पहचान होने पर गर्भस्थ शिशु को जन्म देने या नहीं देने का निर्णय पति-पत्नी के पास रहेगा। एम्स जोधपुर में शिशु रोग विभाग में पिछले एक साल में जोधपुर के 2, नागौर के 2, बाड़मेर से 1, चूरू से 1 मरीज सहित अब तक 10 मरीज सामने आए हैं।