
जोधपुर। कन्जूमर कोर्ट ने फिल्म देखने गए दर्शक से पानी की बोतल के मार्केट रेट से 30 रुपए अधिक लेने को अनुचित व्यापार-व्यवहार मानते हुए उपभोक्ता को 25 हजार रुपए देने के साथ ही मल्टीप्लेक्स पर एक लाख रुपए का हर्जाना अलग से लगाया। कोर्ट ने कहा है कि विक्रेता व निर्माता की ओर से एक ही वस्तु के दो अलग-अलग एमआरपी तय कर उपभोक्ता से अधिक कीमत वसूल करना गैर कानूनी है।
उपभोक्ता की ओर से अधिवक्ता ने कंजूमर कोर्ट मे मल्टीप्लेक्स और बहुराष्ट्रीय पेय पदार्थ कम्पनी के खिलाफ परिवाद देकर बताया कि शहर के नामी मल्टीप्लेक्स में पानी की बोतल खरीदने पर पचास रुपए वसूले, जबकि मार्केट में वही बोतल 20 रुपए में मिलती है। मल्टीप्लेक्स आईनोक्स लेजर लि. की ओर से कहा कि बोतल पर निर्माता द्वारा ही पचास रुपए विक्रय मूल्य अंकित होने से 50 रुपए लिए गए। सिनेमा हाल द्वारा दर्शकों को विशेष सुविधाएं दिए जाने से बाजार के बजाय अधिक एमआरपी पर बोतल बेचा जाना गैरकानूनी नहीं है।
बाजार में 20 रुपए, सिनेमाघर में 50 रुपए
एमजीएच रोड निवासी जितेंद्र बोहरा 10 फरवरी 2017 को हाईकोर्ट रोड स्थित आईनोक्स सिनेमा हाल में पिक्चर देखने गए। इन्टरवेल के दौरान काउंटर से दो किनले ब्रांड (कोका कोला कम्पनी) पानी की बोतल खरीदी। मल्टीप्लेक्स कैन्टीन संचालक ने दो बोतल के 100 रुपए ले लिए। बोतल पर अधिकतम विक्रय मूल्य (एमआरपी) 50 रुपए थी, जबकि वही बोतल मार्केट में बीस रुपए एमआरपी में उपलब्ध है।
एक लाख रुपए राज्य आयोग में जमा कराने होंगे
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय के अध्यक्ष डॉ. श्याम सुंदर लाटा तथा सदस्य अफसाना खान ने निर्णय में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कानून में संशोधन कर एक ही वस्तु के दोहरे व भिन्न-भिन्न एमआरपी निर्धारित किए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। सिनेमा हाल द्वारा फिल्म दिखाने के लिए टिकट राशि अलग से वसूल की जाती है। पानी की बोतल खरीदने पर परिवादी को कोई विशेष सुविधाएं नहीं दी गई है। अधिक मुनाफा कमाने के लिए बाजार दर से ज्यादा विक्रय मूल्य निर्धारण करना बोटलर कंपनी व मल्टीप्लेक्स की आपसी मिलीभगत का मामला है, जिससे उपभोक्ता बाध्य नहीं है। कोर्ट ने उपभोक्ता को शारीरिक व मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति के बीस हजार रुपए तथा विधिक खर्च के पांच हजार रुपए आइनोक्स लेजर लिमिटेड के मालिक को भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ मल्टीप्लेक्स ने दर्शकों से लम्बे समय से इस प्रकार नाजायज राशि संग्रहण कर अनुचित व्यापार व्यवहार किए जाने पर एक लाख रुपए की हर्जाना राशि राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में दो माह में जमा कराने का भी आदेश दिया।
Published on:
05 Aug 2023 11:42 am
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