शुक्रवार को भूंगरा गांव की हर ढाणी शोक के गम में डूबी थी। हर किसी के आंखों में तबाही का वो मंजर घूम रहा था। हर आंख शून्य भाव से देख रही थी। शुक्रवार को जब पत्रिका टीम सगतसिंह की ढाणी पहुंची तो वहां पर तबाही का मंजर फैला था। बिखरा सामान, टूटी दीवारे अपने आप में सब कुछ बयां कर रहा था। सगतसिंह के एक मासूम पौत्र व एक अन्य मासूम बालिका की इस हादसे में गुरूवार को अस्पताल में जान चली गई थी। सगतसिंह की ढ़ाणी के आगे एक झौंपड़े के पास बैठे गांव वाले मानों किसी का इंतजार कर रहे हैं।