
Indian Air Force
गजेंद्र सिंह दहिया/जोधपुर. इस साल सात महीनों में ही वायुसेना के जोधपुर स्टेशन पर 9 लड़ाकू विमानों से परिंदे टकराए हैं। जिनसे वायुसेना को करीब 250 करोड़ का नुकसान हुआ है। कुछ मामलों में लड़ाकू विमान सुखोई-30 और मिग-27 के इंजन बदलने पड़ गए जबकि कुछ दुर्घटना में इंजन में नई ब्लेड्स लगानी पड़ी। जानकारों के अनुसार इतने बजट में तो मिग-27 का एक नया विमान आ जाता।
प्रशासन व आम नागरिकों से बार-बार आग्रह करने के बावजूद बर्ड हिट (पक्षी का विमान से टकराना) के मामले थमते नहीं देख अब जोधपुर वायुसेना स्टेशन ने डॉग मोड्यूल की अनुमति मांगी है। इसके अंतर्गत गली-मौहल्ले के डॉग (श्वान) को पक्षियों को भगाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। जोधपुर वायुसेना स्टेशन के चारों तरफ एक नगर निगम का और एक प्राइवेट नाला है। निगम का नाला 1 किलोमीटर लंबा है जो विमान के लैंडिंग एप्रोच के बीच में से गुजरता है।
अधिकतर बर्ड हीट विमान के चढऩे व उतरने के समय होती है। सबसे अधिक खतरा सिविल फ्लाइट का रहता है क्योंकि उनकी स्पीड धीमे होती है और चढऩे-उतरने में समय लगता है। 28 जलाई 2017 को जेट एयरवेज की जोधपुर-मुंबई फ्लाइट के इंजन में चिडिय़ा घुस गई थी और इंजन से चिंगारिया निकलने लगी। तब पायलट से सुझबूझ दिखाते हुए सुरक्षित लैडिंग करवाई। उसमें 162 यात्री सवार थे।
विमान को देखने के 1 करोड़ लेती है एचएएल
भारतीय वायुसेना के विमानों की मेंटेनेंस और सर्विसिंग हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (एचएएल) लिमिटेड करती है। एचएएल दुर्घटनाग्रस्त विमान की प्राथमिक जांच के ही एक करोड़ रुपए लेती है। सुखोई का पूरा इंजन खराब हो जाने पर उसे बदलने के लिए 45 से 50 करोड़ रुपए लगते हैं। इंजन की ब्लेड्स 8 करोड़ रुपए की आती है। मिग-27 का इंजन करीब 9 करोड़ रुपए का है। विमान की बॉडी पर डेमेज व शीशे पर लगे स्क्रेच को दुरुस्त करने के लिए भी बहुत अधिक पैसा लगता है। कई बार कॉकपिट भी बदलना पड़ता है।
6 से 8 महीने बाद रिपेयर होकर आता है विमान
वायुसेना की सबसे बड़ी परेशानी यह भी है कि रिपयेरिंग के लिए गए विमान को वापस आने में 6 से 8 महीने तक लग जाते हैं, तब तक पायलट को दूसरा विमान देखना पड़ता है।
इन 4 पक्षियों से ज्यादा खतरा
1 कबूतर
2 बगुला
3 टिटहरी
4 चील
डॉग मॉड्यूल में होंगे 10 डॉग
विश्व में लड़ाकू विमानों से बर्ड हिट के 23 प्रतिशत मामले होते हैं। कई देशों में पक्षियों को भगाने के लिए डॉग की मदद ली जा रही है। जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर भी डॉग मॉड्यूल तैयार किया जाएगा। इसमें करीब 10 डॉग होंगे जो आसपास के गली-मौहल्लों में श्वान के प्रजनन के बाद लिए जाएंगे। बचपन से ही डॉग को प्रशिक्षित किया जाएगा। इनको पक्षियों से भगाने के साथ लड़ाकू विमान की आवाज का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि जेट की आवाज से वे स्वयं नहीं भाग जाएं। प्रशिक्षण के बाद इन्हें रन-वे एप्रोच पर बने पॉइंट्स पर तैनात किया जाएगा।
जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर बर्ड हिट के मामले
वर्ष ------ बर्ड हिट
2014------ 7
2015 ------10
2016 ------ 9
2017 ------11
2018 ------7
2019 अब तक ------9
Published on:
31 Jul 2019 11:54 am
