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नोबल पुरस्कार विजेता सर वी एस नायपॉल सच लिखने से नहीं डरते थे
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नोबल पुरस्कार विजेता सर वी एस नायपॉल सच लिखने से नहीं डरते थे

जोधपुर. भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक और नोबेल पुरस्कार विजेता साहित्यकार सर वी.एस.नायपॉल कड़वा सच लिखते थे और सच लिखने से नहीं डरते थे। उनका रविवार को निधन हो गया। नायपॉल के निधन से साहित्यिक जगत में शोक की लहर छा गई है।
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जोधपुर

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MI Zahir

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Updated: 12 Aug 2018, 5:25 PM IST

जोधपुर. भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक और नोबेल पुरस्कार विजेता साहित्यकार सर वी.एस.नायपॉल कड़वा सच लिखते थे और सच लिखने से नहीं डरते थे। उनका रविवार को निधन हो गया। नायपॉल के निधन से साहित्यिक जगत में शोक की लहर छा गई है।

पूरा नाम विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल

नायपॉल का पूरा नाम विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल था। नायपॉल का जन्म 17 अगस्त 1932 को त्रिनिडाड में हुआ था। बाद में वह इंग्लैंड में बसे और उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। उनका पहला उपन्यास द मिस्टिक मैसर साल 1951 में छपा था। उन्हें ब्रिटिश सरकार ने 1990 में नाइट की उपाधि से नवाजा था।

कोई समझौता नहीं करते थे

सर नायपॉल अंग्रेजी के एक महान लेखक थे। वे एक मास्टर स्टाइलिस्ट और फिक्शन राइटर। वे किसी तरह का कोई समझौता नहीं करते थे। उनके लेखन में कॉमिक साफगोई थी और उनकी लेखन यात्रा एक कड़वी सच्चाई लिख रही थी वह विकासशील दुनिया को ग्लैमरस या आदर्श बनाने से इन्कार कर रही थी। उन्हें एक बड़े बौद्धिक लेखक के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने एक मूल, उग्र आलोचना को राजनीतिक सोच से मुक्त कर दिया। उन्होंने धर्मान्धता पर हमला किया, और अफ्रीका के भ्रष्टाचार और आत्म-प्रेरित दु:ख दुनिया के सामने रखा।

दुनिया से नाराज थे
नायपॉल का लेखन कई आलोचकों के लिए परेशान करने वाला था और यहां तक कि रिश्ता बिगड़ ही गया था। उन्होंने अपनी साहित्यिक विलक्षणता पहचानी, लेकिन उन्हें एक नफरत करने वाले शख्स के रूप में भी देखा गया। एक चाचा टॉम ने रूढि़वाद को समझा, पूर्वाग्रहों के बारे में बेबाकी से लिखा और वे जिस दुनिया से जिस दुनिया में आए थे, वे उससे नाराज हो गए।

अफ्रीका के हालात
उन्होंने एक बार घोषित किया था, और निश्चित रूप से उन्होंने अपनी शिकायत का कारण दिया कि मजहब और अरबों की तरह शायद कोई साम्राज्यवाद नहीं रहा है, उन्होंने कैरेबियाई कड़वाहट को सच्चाई से लिखा था कि अफ्रीका के हालात क्या हैं, ये दुनिया को बताया।

द वल्र्ड इज वॉट इट इज द ऑथोराइज्ड बायोग्राफी
जोधपुर में अंग्रेजी के रचनाकार और आलोचक प्रो. एस डी कपूर ने उनके निधन को विश्व साहित्य जगत की महत्वपूर्ण क्षति बताते हुए कहा कि ब्रिटिश लेखक पैट्रिक फ्रेंच ने उनकी बायोग्राफी द वल्र्ड इज वॉट इट इज द ऑथोराइज्ड बायोग्राफी ऑफ वी.एस.नायपॉल लिखी है, जिसमें उन्होंने बड़ी सपाटबयानी से अपनी जिंदगी की घटनाओं के बारे में बताया है।

 

ए हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास
डॉ. कपूर ने बताया कि उन्होंने साल 1950 में सरकारी स्कॉलरशिप प्राप्त की। ए बैंड इन द रिवर और अ हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास उनकी चर्चित कृतियां रहीं। नायपॉल को साल 1971 में बुकर और वर्ष 2001 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 30 से अधिक किताबें लिखीं। अपने सबसे चर्चित उपन्यास ए हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास को लिखने में उन्हें तीन साल से ज्यादा का समय लगा। नायपॉल को एक महान लेखक के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।