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कबाड़ वाहनों से बिगड़ रही कोमलदेव शासकीय अस्पताल की तस्वीर, लापरवाही उजागर

कोमलदेव शासकीय चिकित्सालय परिसर वैसे तो बहुत खुबसूरत है पर वहां वर्षों से खड़े कबाड़ वाहनों के कारण आस-पास का इलाका गंदा और परिसर की शोभा खराब हो रही है।
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कांकेर

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Bhawna Chaudhary

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Updated: 26 Apr 2019, 10:00 PM IST

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कबाड़ वाहनों से बिगड़ रही कोमलदेव शासकीय अस्पताल की तस्वीर, लापरवाही उजागर

कांकेर. कोमलदेव शासकीय चिकित्सालय परिसर वैसे तो बहुत खुबसूरत है पर वहां वर्षों से खड़े कबाड़ वाहनों के कारण आस-पास का इलाका गंदा और परिसर की शोभा खराब हो रही है। विभाग व प्रबंधन इन वाहनों के निस्तारण को लेकर गंभीर नहीं है। परिसर में तीन एंबुलेंस सहित कुल चार वाहन विशेष कबाड़ हालत में हैं। प्रबंधन भी पत्राचार कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है।

परिसर से उक्त कबाड़ वाहनों को कब हटाया जाएगा यह बता पाने की की स्थिति में कोई नहीं हैं। जिला अस्पताल परिसर में ब्लड बैंक के सामने दो एंबुलेंस तथा उसके बगल में एक ट्रक लंबे समय से खड़े हैं। एक एंबुलेंस आयुष विभाग के सामने खड़ी है। तीन वाहन तो बिल्कुल ही कबाड़ हालत में हैं और निलाम कर वहां से हटाने की स्थिति में हैं। लंबे समय से खड़ा होने के कारण इन वाहनों के आस-पास गंदगी का अंबार है और अस्पताल में आने वाले यहां सुबह-शाम पेशाब भी करते हैं। दो वाहनों के आस-पास कभी सफाई भी नहीं की जाती। जिससे बीमारियों के फैलने का भी खतरा बढ़ जाता है।

अस्पताल प्रबंधन आखिर वर्षों से खड़े इन वाहनों को क्यों नहीं वहां से हटाने की कार्रवाई कर रहा यह समझ से परे हैं। इस वाहनों में दो तो १०८ एंबुलेंस हैं। जिला अस्पताल प्रबंधन की माने तो एक ट्रक की नीलामी हो चुकी है और उसे खरीदने वाले ने एक धरोहर धनराशि भी जमा की हे। कई बार नोटिस देने के बाद भी वह उस वाहन को वहां से हटा नहीं रहा है। अब उसे अंतिम नोटिस देकर उसकी धरोहर राशि जब्त कर ट्रक की फिर से नीलामी की प्रक्रिया की जा रही है। मुख्य चिकित्साधिकारी को इस आशय का पत्र लिखा गया है। ट्रक के खरीदार से अब अस्पताल प्रशासन उस जमीन का किराया भी वसूल करेगा जहां उसकी ट्रक खड़ी है।

शेष एंबुलेंस को हटाने के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। प्रयास है कि उन वाहनों को भी जल्दी वहां से हटाया जाए। अस्पताल में प्रवेश करते ही कबाड़ वाहनों से लोगों का दीदार होता है। ऐसे में सभी के मुंह से बरसब यही निकलता है कि आखिर कब तक विभाग इन्हें लावारिश की तरह पड़ा रहने देगा। विभाग को चाहिए कि वह इन वाहनों को कबाड़ स ेमें बेच कर इन्हें निस्तारित करें। आखिर विभाग को इसे रखने को कोई लाभ होता तो भी बात समझ में आती।